विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Sugarcane Crushing Crisis Karnataka Cm Shivakumar Appeals To Pm Modi Demands Increase Sugar Msp Ethanol Prices

कर्नाटक में गन्ना पेराई पर संकट: CM शिवकुमार की PM मोदी से अपील, चीनी MSP और इथेनॉल कीमत बढ़ाने की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 19 Oct 2026 04:52 PM IST
सार

  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गन्ना किसानों की मांगों पर तत्काल फैसला लेने की अपील की।

  • उत्तर कर्नाटक में आंदोलन के कारण चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होने में देरी हो रही है।

  • शिवकुमार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाने की मांग की।

  • मुख्यमंत्री ने गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को खरीद निविदा से बाहर रखने के फैसले की समीक्षा करने को कहा।

CM शिवकुमार की PM मोदी से अपील (फाइल फोटो)
CM शिवकुमार की PM मोदी से अपील (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गन्ना किसानों की मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की है। उत्तर कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन जारी रहने से चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू होने में देरी हो रही है। इससे खेतों में तैयार खड़ी गन्ने की फसल का वजन और उसमें चीनी की मात्रा घटने का खतरा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

शिवकुमार ने सोमवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर कई जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ किसान हुब्बल्ली में केंद्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करने के लिए पदयात्रा भी निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर सड़कें जाम होने की खबरें हैं। वहीं, हाई कोर्ट ने मंत्री के आवास पर प्रदर्शन को रोकने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर में प्रदर्शनकारी किसानों से मुलाकात कर पदयात्रा वापस लेने की अपील की थी। हालांकि, किसानों का कहना था कि उनकी प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। केंद्र से आश्वासन मिलने के बिना वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

राज्य सरकार ने उठाए कदम, फिर भी जारी है आंदोलन
शिवकुमार ने कहा कि सड़क जाम होने से आम लोगों को परेशानी हो रही है और कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। राज्य सरकार ने अपने स्तर पर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की सभी 81 चालू चीनी मिलों में डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं, ताकि गन्ने का वजन और चीनी की रिकवरी पर नजर रखी जा सके।

मिलों को अपनी रिकवरी जांच प्रयोगशालाओं के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता लेने का निर्देश भी दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन उपायों के बाद चीनी की औसत रिकवरी दर 2022-23 में 9.91 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई।

उन्होंने यह भी बताया कि 2025-26 में मिलों की ओर से तय कीमत के अलावा किसानों को 100 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसमें राज्य सरकार ने अपने खजाने से 50 रुपये प्रति टन दिए। इस मद में किसानों को करीब 290 करोड़ रुपये सीधे भुगतान किए गए। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि किसानों की मुख्य मांगों पर फैसला केंद्र सरकार ही कर सकती है।

चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की मांग की है। उनके मुताबिक, फरवरी 2019 से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 2,750 रुपये से बढ़कर 3,650 रुपये प्रति टन हो गया है। उन्होंने कहा कि जब चीनी का बिक्री मूल्य वर्ष 2019 के स्तर पर बना हुआ है, तो मिलों के लिए किसानों को उचित गन्ना मूल्य देना मुश्किल हो जाता है।

शिवकुमार ने घरेलू इस्तेमाल और व्यावसायिक खरीदारों के लिए चीनी के अलग-अलग न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने का सुझाव दिया। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ बड़े व्यावसायिक खरीदारों से उचित कीमत वसूलने में मदद मिल सकती है।

गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद पर भी उठाया सवाल
शिवकुमार ने तेल विपणन कंपनियों की ओर से 16 अक्टूबर को जारी इथेनॉल खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को शामिल नहीं करने के फैसले की समीक्षा करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में गन्ने से इथेनॉल बनाने की सालाना क्षमता 225 करोड़ लीटर है। इन स्रोतों से बने इथेनॉल को खरीद प्रक्रिया से बाहर रखने पर चीनी मिलों की कमाई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान करने में भी दिक्कत आ सकती है।

मुख्यमंत्री ने मिलों की स्थापित उत्पादन क्षमता के अनुपात में गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद का उचित हिस्सा तय करने और इसकी कीमतें बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की कीमतें 2022-23 से नहीं बढ़ाई गई हैं, जबकि इस दौरान गन्ने का FRP बढ़ चुका है।

FRP की गणना के लिए रिकवरी दर 9.50% करने की मांग
मुख्यमंत्री ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली आधार रिकवरी दर को मौजूदा 10.25 प्रतिशत से घटाकर 9.50 प्रतिशत करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि गन्ने से चीनी की रिकवरी मिट्टी, जलवायु और पेराई शुरू होने के समय जैसे कारकों पर निर्भर करती है। इन परिस्थितियों पर किसानों का नियंत्रण नहीं होता।

ऐसे में कम रिकवरी वाले क्षेत्रों के किसानों को आधार FRP का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। शिवकुमार ने कहा कि आधार रिकवरी दर को फिर से 9.50 प्रतिशत करने से गन्ने का उचित मूल्य तय करते समय किसानों की वास्तविक लागत को ध्यान में रखने में मदद मिलेगी।

केंद्र की समिति से उम्मीद, लेकिन जल्द फैसले की जरूरत
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की समस्याओं की जांच के लिए केंद्र सरकार की ओर से 14 अक्टूबर को गठित समिति का स्वागत किया। इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समिति अपना काम जारी रख सकती है, लेकिन पेराई सत्र में देरी को देखते हुए किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेना जरूरी है। शिवकुमार के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से समय पर स्पष्ट आश्वासन मिलने से राज्य सरकार किसानों को आंदोलन समाप्त करने के लिए मना सकेगी और चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू करने का रास्ता साफ हो सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन