भारत में इस सीजन चीनी उत्पादन घटने की आशंका है। इसी बीच, तेल कंपनियों ने 2026-27 सीजन के लिए इथेनॉल खरीद की नई निविदा जारी की है, जिसमें गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इस फैसले से चीनी मिलों के सामने यह तय करने की चुनौती बढ़ सकती है कि गन्ने का कितना हिस्सा चीनी बनाने में इस्तेमाल किया जाए और कितना इथेनॉल उत्पादन के लिए।
सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) समेत तेल विपणन कंपनियों ने 2026-27 सीजन के लिए 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।
इस निविदा में सी-हैवी मोलासेस, मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिशेष चावल समेत अन्य योग्य स्रोतों से बने इथेनॉल को शामिल किया गया है। वहीं, गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को इससे बाहर रखा गया है।
पिछले साल के मुकाबले घट सकता है चीनी उत्पादन
अनुमानों के मुताबिक, भारत में इस सीजन चीनी उत्पादन 270 लाख से 295 लाख टन के बीच रह सकता है। पिछले साल उत्पादन करीब 310 लाख टन था। वहीं, देश में चीनी की खपत 285 लाख से 290 लाख टन रहने का अनुमान है। ऐसे में उत्पादन और घरेलू मांग के बीच अंतर काफी कम रहने की आशंका है।
कमजोर मानसून के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर भी चिंता बढ़ी है। खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी उत्पादन में 14 से 19 प्रतिशत तक गिरावट आने का अनुमान है। ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं। वहीं, मध्य प्रदेश और कुछ उत्तरी राज्यों में उत्पादन की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। इसके बावजूद महाराष्ट्र और कर्नाटक में संभावित गिरावट से देश में चीनी की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
चीनी की कीमतों में मजबूती
उत्पादन घटने और आपूर्ति कम रहने की आशंका के बीच हाल के महीनों में चीनी की कीमतों में मजबूती आई है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने और वैश्विक बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंताओं ने भी कीमतों को सहारा दिया है।
ऐसे में चीनी मिलों के लिए घरेलू मांग पूरी करने और इथेनॉल उत्पादन से होने वाली कमाई के बीच संतुलन बनाना अहम होगा। खरीद नीति में बदलाव से मिलों के फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं कि वे गन्ने और उससे बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल किस तरह करें।
इथेनॉल उत्पादन में अनाज की बड़ी हिस्सेदारी
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इथेनॉल बनाने के लिए अनाज आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल भी बढ़ा है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल आपूर्ति में मक्का की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत, अधिशेष चावल की 22 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त अनाज की 7 प्रतिशत रही है। इस तरह इन तीनों अनाज आधारित स्रोतों का कुल योगदान लगभग 71 प्रतिशत है, जबकि गन्ने से जुड़े स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत बताई गई है।
चीनी उत्पादन में संभावित गिरावट और नई निविदा में कुछ गन्ना आधारित स्रोतों को जगह नहीं मिलने के कारण मिलों को अपनी उत्पादन रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। उन्हें घरेलू चीनी की जरूरत, इथेनॉल से होने वाली कमाई और सरकार की खरीद नीति को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।
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