चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और दिवाली के दौरान मांग पूरी करने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में 14 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी है। सरकार ने तय समय से दो दिन पहले ही बिक्री कोटे की घोषणा कर दी। पिछले 10 दिनों में मिलों से बिकने वाली चीनी की कीमत में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आने वाले 25 दिन चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।
खाद्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े यानी 16 से 31 अक्टूबर के लिए घरेलू चीनी मिलों को 14 लाख टन और आयातकों को 2 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और दिवाली के दौरान मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
दिवाली से पहले चीनी की मांग बढ़ने की आशंका
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में चीनी की मिल-स्तरीय कीमतों में तेजी आई है। दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। त्योहार के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए सरकार ने बिक्री कोटे की घोषणा पहले कर दी।
कुछ मिलों ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए तय बिक्री कोटा पूरा इस्तेमाल कर लिया था। इस वजह से वे आगे चीनी नहीं बेच पा रही थीं। बाजार में स्टॉक कम होने की आशंका और कीमतों में तेजी के पीछे इसे भी एक कारण माना जा रहा है।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में शुरू हो सकती है पेराई
दशहरा, जो 20 अक्टूबर को मनाया जाना है, के लिए चीनी की मांग लगभग पूरी हो चुकी है। अब बाजार की नजर दिवाली की मांग पर है। महाराष्ट्र में 30 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है, जबकि अगले कुछ दिनों में 10 और मिलों के शुरू होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में भी करीब 10 से 15 मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर सकती हैं।
सरकार ने पहले ही संकेत दिया है कि अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बेचने के लिए मिलों को बिक्री कोटे का इंतजार नहीं करना होगा। एक सरकारी सूत्र के अनुसार, यदि अक्टूबर में 15 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है, तो नवंबर की मांग पूरी करने में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल बाजार में आपूर्ति की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
तीन राज्यों को मिला 83 फीसदी कोटा
खाद्य मंत्रालय के आदेश के अनुसार, देश के तीन प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक को कुल 14 लाख टन कोटे में से 11.59 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है। यह कुल कोटे का करीब 83 फीसदी है।
राज्यवार आवंटन इस प्रकार है-
महाराष्ट्र : 4.76 लाख टन
उत्तर प्रदेश : 4.51 लाख टन
कर्नाटक : 2.32 लाख टन
देश की 587 चीनी मिलों में से 134 को इस अवधि के लिए कोई कोटा नहीं मिला है। वहीं, 39 मिलों को 100 टन तक का कोटा आवंटित किया गया है। सरकार ने श्री रेणुका शुगर्स को 1.30 लाख टन और श्री दत्त इंडिया को 70 हजार टन चीनी बेचने की अनुमति भी दी है। इन दोनों रिफाइनरियों को घरेलू बाजार में बेचने के लिए आयातित चीनी की मंजूरी मिली थी, लेकिन कीमतों में अंतर के कारण वे उपलब्ध कोटे का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाईं।
दिल्ली में चीनी 65 रुपये किलो तक पहुंची
चीनी की थोक कीमतों में तेजी का असर कुछ खुदरा बाजारों में भी दिखने लगा है। दिल्ली के कुछ इलाकों में चीनी की कीमत पिछले दो-तीन दिनों में 60 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालांकि, कई अन्य बाजारों में खुदरा कीमतों में अभी बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। ओडिशा के सोनपुर में चीनी 50 से 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से बिक्री की कीमत करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। महाराष्ट्र में भी मिल-स्तर पर कीमत करीब 5,100 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है।
नवंबर की मांग पूरी करने के लिए उत्पादन जरूरी
व्यापार से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, सितंबर में सरकार ने 26.5 लाख टन और अक्टूबर में 30 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा घोषित किया था। इसके बावजूद घरेलू और आयातित चीनी की कुछ मात्रा बाजार में नहीं बिक पाई।
सूत्र के अनुसार, आयातित चीनी को अलग रखने पर अक्टूबर में घरेलू मिलों के लिए कुल आवंटन करीब 27 लाख टन है। 30 सितंबर को देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक 32 से 35 लाख टन के बीच था। नवंबर में चीनी की मांग करीब 24 से 25 लाख टन रहने का अनुमान है।
ऐसे में नवंबर की जरूरत पूरी करने के लिए अक्टूबर में कम से कम 12 से 13 लाख टन चीनी का उत्पादन जरूरी माना जा रहा है। दिवाली से पहले मांग और मिलों के स्टॉक पर नजर बनी रहेगी। यदि उत्पादन और आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं बढ़ती, तो चीनी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
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