पश्चिमी घाट के कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में इस साल बारिश की कमी और कीटों के बढ़ते हमले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक सूखा रहने के कारण कॉफी की अरेबिका किस्म पर सफेद तना छेदक कीट (व्हाइट स्टेम बोरर) का प्रकोप बढ़ गया है। इससे वर्ष 2026-27 में भारत में अरेबिका कॉफी का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउथ इंडिया (UPASI) की कॉफी समिति के अध्यक्ष सहदेव बालकृष्ण ने बिजनेस लाइन को बताया कि ज्यादातर कॉफी बागानों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई है। अरेबिका की फसल पर सफेद तना छेदक कीट का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। इस साल जनवरी-फरवरी में ही फूल आने के लिए बारिश होने के कारण कुछ क्षेत्रों में कटाई भी जल्दी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि अरेबिका की फसल की वास्तविक स्थिति का पता नवंबर की शुरुआत में चल सकेगा। हालांकि, इस सीजन में इसका उत्पादन 1.10 लाख टन से अधिक रहने की संभावना कम है।
कर्नाटक और तमिलनाडु में उत्पादन घटने का अनुमान
पारंपरिक कॉफी उत्पादक राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु में अरेबिका का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 5,000 से 10,000 टन तक घट सकता है। हालांकि, आंध्र प्रदेश जैसे उन राज्यों में उत्पादन बढ़ने से इसकी कुछ भरपाई होने की उम्मीद है, जहां कॉफी की खेती का विस्तार हुआ है।
भारत में 2025-26 के फसल वर्ष में अरेबिका कॉफी का उत्पादन 1.11 लाख टन रहा था। इसमें अकेले कर्नाटक का योगदान 79,145 टन था। कॉफी बोर्ड ने शुरुआती अनुमान में 2026-27 के दौरान देश में अरेबिका का उत्पादन 1.20 लाख टन रहने की संभावना जताई थी। इसमें कर्नाटक से 84,015 टन उत्पादन का अनुमान था।
कॉफी बोर्ड के अनुमान पर उठ रहे सवाल
कॉफी बोर्ड ने 2026-27 के लिए देश में कुल कॉफी उत्पादन 4.04 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले साल यह 3.73 लाख टन था। कर्नाटक में कुल कॉफी उत्पादन 2.56 लाख टन से बढ़कर 2.79 लाख टन होने का अनुमान है।
हालांकि, कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एम. सलमान बसीर के मुताबिक, राज्य में अरेबिका की फसल पिछले साल से कमजोर है। उन्होंने उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका जताई है। उनके अनुसार, कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी और अनियमित वर्षा के साथ सफेद तना छेदक कीट का प्रकोप भी बढ़ा है।
बसीर ने एसोसिएशन की हालिया वार्षिक आम बैठक में कहा था कि कॉफी बोर्ड का शुरुआती अनुमान बेहतर मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर लगाया गया है। लेकिन बाद में मानसून की अनियमितता, कम बारिश और कीटों के बढ़ते प्रकोप से वास्तविक उत्पादन घट सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर अरेबिका की खेती वाले क्षेत्रों में पड़ने की आशंका है।
75 फीसदी क्षेत्रों में बारिश की कमी
कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.सी. करियप्पा ने बताया कि राज्य के करीब एक चौथाई कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में ही इस साल संतोषजनक बारिश हुई है। बाकी क्षेत्रों में बारिश की कमी रही।उन्होंने कहा कि अरेबिका की फसल पर सफेद तना छेदक कीट के गंभीर हमले से उत्पादन की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा, कुशल मजदूरों की कमी के कारण कीटों को नियंत्रित करने में भी परेशानी आ रही है। इससे इस सीजन में कॉफी की फसल पर दबाव और बढ़ गया है।
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