विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Start Your Own Business With A Loan From An Shg Suman From Up Has Built A Sanitary Napkin Enterprise Now Rea

SHG से लोन लेकर शुरू करें अपना कारोबार : UP की सुमन ने खड़ा किया सैनिटरी नैपकिन का व्यापार, 30 गांवों तक पहुंच

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 22 Oct 2026 12:02 PM IST
सार

  • झांसी की सुमन गौतम ने स्वयं सहायता समूह की मदद से शुरू किया सैनिटरी नैपकिन का कारोबार।
  • 15 हजार रुपये की बचत और 1.10 लाख रुपये के लोन से की बिजनेस की शुरुआत।
  • ई-रिक्शा से 30 गांवों तक सैनिटरी नैपकिन पहुंचाकर हर महीने कमा रही हैं करीब 20 हजार रुपये।
  • ट्रेनिंग और मार्केटिंग के जरिए कारोबार को आगे बढ़ाया, अब 60 गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य।
     

SHG मॉडल खुद का व्यापार खड़ा करने में आया काम।
SHG मॉडल खुद का व्यापार खड़ा करने में आया काम। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सरकारी मदद और स्वयं सहायता समूह मॉडल की मदद लेते हुए झांसी की रहने वाली सुमन ने सैनिटरी नैपकिन का कारोबार शुरू किया है, जो अब 30 गांवों तक फैल चुका है। झांसी जिले के दुर्गापुर गांव में रहने वाली 35 साल की सुमन मां गायत्री स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। इसके अलावा वह उन्नति प्रेरणा ग्राम संगठन और गंगासागर महिला प्रेरणा संकुल समिति से जुडी हुई हैं।

अपनी बचत और एसएचजी से लिया लोन
साल 2024 में सुमन ने अपना खुद का काम शुरू करने का फैसला किया, जिसके लिए उनकी 15 हजार रुपये की शुरुआती बचत और समूह के जरिए मिले 1.10 लाख रुपये का लोन काम आया। लगातार मेहनत की बदौलत उनका यह काम गांव-गांव तक पहुंचने लगा।

ई-रिक्शा से डिलीवरी और हर महीने 20 हजार की आमदनी
अपने सैनिटरी नैपकिन को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए सुमन ने ई-रिक्शा का सहारा लिया है। इसी ई-रिक्शा के जरिए वह आसपास के 30 गांवों तक सैनिटरी नैपकिन की डिलीवरी करती हैं। इस उद्यम से उन्हें फिलहाल हर महीने करीब 20 हजार रुपये की कमाई हो रही है। अब उनका लक्ष्य अपने इस नेटवर्क को दोगुना करके 60 गांवों तक ले जाने का है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को आसानी से सैनिटरी नैपकिन मिल सके।

ट्रेनिंग से बढ़ा आत्मविश्वास
अपने कारोबार को सही तरीके से चलाने के लिए सुमन ने हिसाब-किताब रखने और मार्केटिंग (विपणन सामग्री) की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्हें लखनऊ में एक 'एक्सपोजर विजिट' पर जाने का भी मौका मिला। इन सब प्रयासों से उन्हें अपना काम व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिली और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ।

कमाई के साथ-साथ जागरूकता का भी काम
सुमन अपने इस काम को केवल कमाई तक सीमित न रखकर समाज सेवा से भी जोड़ रही हैं। गांवों में सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने के साथ-साथ वह ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को माहवारी (मासिक धर्म) के दौरान साफ-सफाई रखने के फायदों के बारे में भी जागरूक कर रही हैं।

सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटी बचत, लोन, सही ट्रेनिंग और संस्थागत मदद के सहारे ग्रामीण महिलाएं अपना खुद का रोजगार सफलतापूर्वक चला सकती हैं।


विज्ञापन
विज्ञापन