सरकारी मदद और स्वयं सहायता समूह मॉडल की मदद लेते हुए झांसी की रहने वाली सुमन ने सैनिटरी नैपकिन का कारोबार शुरू किया है, जो अब 30 गांवों तक फैल चुका है। झांसी जिले के दुर्गापुर गांव में रहने वाली 35 साल की सुमन मां गायत्री स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। इसके अलावा वह उन्नति प्रेरणा ग्राम संगठन और गंगासागर महिला प्रेरणा संकुल समिति से जुडी हुई हैं।
अपनी बचत और एसएचजी से लिया लोन
साल 2024 में सुमन ने अपना खुद का काम शुरू करने का फैसला किया, जिसके लिए उनकी 15 हजार रुपये की शुरुआती बचत और समूह के जरिए मिले 1.10 लाख रुपये का लोन काम आया। लगातार मेहनत की बदौलत उनका यह काम गांव-गांव तक पहुंचने लगा।
ई-रिक्शा से डिलीवरी और हर महीने 20 हजार की आमदनी
अपने सैनिटरी नैपकिन को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए सुमन ने ई-रिक्शा का सहारा लिया है। इसी ई-रिक्शा के जरिए वह आसपास के 30 गांवों तक सैनिटरी नैपकिन की डिलीवरी करती हैं। इस उद्यम से उन्हें फिलहाल हर महीने करीब 20 हजार रुपये की कमाई हो रही है। अब उनका लक्ष्य अपने इस नेटवर्क को दोगुना करके 60 गांवों तक ले जाने का है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को आसानी से सैनिटरी नैपकिन मिल सके।
ट्रेनिंग से बढ़ा आत्मविश्वास
अपने कारोबार को सही तरीके से चलाने के लिए सुमन ने हिसाब-किताब रखने और मार्केटिंग (विपणन सामग्री) की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्हें लखनऊ में एक 'एक्सपोजर विजिट' पर जाने का भी मौका मिला। इन सब प्रयासों से उन्हें अपना काम व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिली और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ।
कमाई के साथ-साथ जागरूकता का भी काम
सुमन अपने इस काम को केवल कमाई तक सीमित न रखकर समाज सेवा से भी जोड़ रही हैं। गांवों में सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने के साथ-साथ वह ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को माहवारी (मासिक धर्म) के दौरान साफ-सफाई रखने के फायदों के बारे में भी जागरूक कर रही हैं।
सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटी बचत, लोन, सही ट्रेनिंग और संस्थागत मदद के सहारे ग्रामीण महिलाएं अपना खुद का रोजगार सफलतापूर्वक चला सकती हैं।