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बेंगलुरु : मसालों का स्वाद और पोषण बचाने की नई तकनीक, विदेशों तक पहुंचे भारतीय स्टार्टअप के उत्पाद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 22 Oct 2026 12:27 PM IST
सार

  • बेंगलुरु का Infini Agrotek LLP, Aaahara ब्रांड के तहत खास खाद्य उत्पाद तैयार कर रहा है।

  • क्रायोजेनिक ग्राइंडिंग में कम तापमान पर मसालों को पीसने पर जोर दिया जाता है।

  • कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से मसालों के पोषक तत्व और एसेंशियल ऑयल बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकते हैं।

  • स्टार्टअप मिलेट्स, डिहाइड्रेटेड सब्जियों और ब्राह्मी-अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों से जुड़े उत्पाद भी बना रहा है।

मसालों के कारोबार
मसालों के कारोबार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मसालों को पीसने के दौरान निकलने वाली गर्मी से उनकी खुशबू और पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बेंगलुरु का फूड स्टार्टअप इन्फिनी एग्रोटेक एलएलपी (Infini Agrotek LLP) क्रायोजेनिक तकनीक से मसालों को पीस रहा है। कंपनी अपने उत्पाद ‘आहारा’ (Aaahara) ब्रांड के नाम से बेचती है। इसके साथ ही कंपनी पारंपरिक जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों की नई श्रेणी विकसित करने पर भी काम कर रही है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुरेश बाफना ने बिजनेस लाइन को बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य मसालों के प्राकृतिक तेल, खुशबू और पोषक तत्वों को अधिक से अधिक सुरक्षित रखना है। कंपनी ने हाल ही में न्यूजीलैंड और नीदरलैंड में अपने उत्पाद भेजे हैं। अब उसकी नजर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बाजारों पर है। इन देशों में रहने वाले भारतीयों के साथ स्थानीय उपभोक्ताओं तक भी पहुंच बनाने की योजना है।

क्या है क्रायोजेनिक तकनीक?
आमतौर पर मसालों को पीसते समय घर्षण से गर्मी पैदा होती है। इससे मसालों में मौजूद कुछ प्राकृतिक तेल और खुशबू देने वाले तत्व प्रभावित हो सकते हैं। क्रायोजेनिक तकनीक में बेहद कम तापमान पर मसालों को पीसा जाता है, जिससे उनके प्राकृतिक गुणों को बनाए रखने में मदद मिलती है।

सुरेश बाफना के अनुसार, इस प्रक्रिया से मसालों में मौजूद 90 से 99 फीसदी तक सूक्ष्म पोषक तत्वों और आवश्यक तेलों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। कंपनी का दावा है कि उसके उत्पादों की शेल्फ लाइफ यानी इस्तेमाल योग्य रहने की अवधि दो साल तक हो सकती है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त रंग, कृत्रिम खुशबू या रसायन मिलाने की जरूरत नहीं होती।

जड़ी-बूटियों से तैयार कर रही खाने-पीने के उत्पाद
आहारा ने रेडी-टू-कुक खाद्य उत्पादों की श्रेणी में भी कदम रखा है। कंपनी ने छह ऐसे उत्पाद तैयार किए हैं, जिनमें पारंपरिक जड़ी-बूटियों और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने की कोशिश की गई है। इन उत्पादों में मेधा इडली-डोसा मिक्स, बाला अडई, रक्षा कांजी, निद्रा खीर पायसम मिक्स, मनशांति खिचड़ी और सूत्र पोंगल जैसे उत्पाद शामिल हैं।

कंपनी के मुताबिक, इन उत्पादों में मोटे अनाज, सूखी सब्जियों और ब्राह्मी व अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक खाद्य सामग्री को रोज के भोजन का हिस्सा बनाना है, ताकि लोग केवल सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय भोजन के जरिए भी इन सामग्रियों का सेवन कर सकें।

कंपनी ने अपने उत्पाद विकसित करने की प्रक्रियाओं के लिए पेटेंट आवेदन भी दाखिल किए हैं। बाफना के अनुसार, क्रायोजेनिक मसाले और जड़ी-बूटियों से तैयार खाद्य उत्पाद भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत नई श्रेणियां हैं।

कोरोना महामारी के दौरान आया विचार
सुरेश बाफना की खाद्य पदार्थों, पोषण और स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर रुचि कोरोना महामारी के दौरान और बढ़ी। वर्ष 2024 में मसाला क्षेत्र के एक स्टार्टअप को मार्गदर्शन देने के बाद उन्होंने इस विचार पर स्वतंत्र रूप से काम करने का फैसला किया।

कंपनी ने पिछले साल अगस्त में व्यावसायिक कामकाज शुरू किया था और हाल ही में अपना पहला साल पूरा किया है। इस दौरान उसने नीदरलैंड में मसालों की खेप भेजी। जून में न्यूजीलैंड के लिए मसालों और खाद्य उत्पादों को मिलाकर एक खेप भेजी गई।

किसानों से सीधे खरीद की भी तैयारी
कंपनी अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ कच्चे माल की खरीद के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के साथ काम करने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके तहत मोटे अनाज और मसालों की खरीद में किसान संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

इससे कंपनी को कच्चे माल की नियमित आपूर्ति मिल सकती है, जबकि किसानों को अपने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी इस संबंध में किसी साझेदारी का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है।

कुल मिलाकर, आहारा पारंपरिक खाद्य ज्ञान को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक के साथ जोड़कर मसालों और तैयार खाद्य उत्पादों का कारोबार बढ़ाना चाहती है। न्यूजीलैंड और नीदरलैंड में शुरुआती आपूर्ति के बाद अब कंपनी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
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