उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित कृषि और खाद्य उत्पाद कंपनी बीएल एग्रो (BL Agro) अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने जा रही है। कंपनी अगले 10 साल में अफ्रीकी देश तंजानिया में 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह निवेश खाद्य तेल, डेयरी, कृषि, अनुसंधान और विनिर्माण के क्षेत्र में किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपने कारोबार को बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपये का समूह बनाना है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने बिजनेस लाइन को बताया कि इस निवेश का मकसद तंजानिया में लंबे समय तक कारोबारी साझेदारी बनाना और वहां के स्थानीय लोगों को लाभ पहुंचाना है। कंपनी भारत की तकनीक और कृषि क्षेत्र के अनुभव का इस्तेमाल करके तंजानिया में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की योजना बना रही है।
पहले चरण में खाद्य तेल संयंत्र पर 1,500 करोड़ रुपये खर्च
बीएल एग्रो पहले चरण में करीब 1,500 करोड़ रुपये लगाकर खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करेगी। इस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 1,100 टन होगी। स्थानीय स्तर पर सूरजमुखी के बीजों की उपलब्धता को देखते हुए यहां मुख्य रूप से सूरजमुखी तेल तैयार किया जाएगा। संयंत्र अप्रैल 2027 तक शुरू करने की योजना है।
कंपनी अपने उत्पाद ‘नourish’ ब्रांड के तहत बेचेगी। तंजानिया में खाद्य तेल की मौजूदा दैनिक मांग करीब 1,100 टन है, जो कंपनी के प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता के बराबर है। शुरुआत में यहां बनने वाला तेल तंजानिया के बाजार में ही बेचा जाएगा। इसे भारत नहीं भेजा जाएगा।
कंपनी को भविष्य में तंजानिया के पड़ोसी देशों में भी अपने उत्पाद बेचने की संभावना दिख रही है। तंजानिया में कई बंदरगाह हैं, जिनका इस्तेमाल आसपास के देश भी करते हैं। इससे पूर्वी अफ्रीका के दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाना आसान हो सकता है।
गिर गायों से बढ़ाएंगे दूध उत्पादन
बीएल एग्रो अगले 10 वर्षों में करीब 2,000 करोड़ रुपये डेयरी क्षेत्र में निवेश करने की योजना बना रही है। इसके तहत भारत में अपनाए जा रहे गायों की नस्ल सुधार और आनुवंशिकी कार्यक्रम को तंजानिया में लागू किया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, तंजानिया में एक गाय से प्रतिदिन औसतन 1 से 1.5 लीटर दूध मिलता है, जबकि भारत में यह औसत 7 से 8 लीटर बताया गया है। कंपनी भारत से गिर नस्ल की गायें ले जाने और उनके जरिए दूध उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है।
आशीष खंडेलवाल के अनुसार, तंजानिया की जलवायु गायों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुकूल हो सकती है। कंपनी का लक्ष्य बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीकों की मदद से वहां डेयरी उत्पादन में सुधार करना है।
खेती की पैदावार बढ़ाने पर भी जोर
कंपनी तंजानिया में फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए भी काम करेगी। खंडेलवाल के मुताबिक, वहां प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन करीब 800 से 900 किलोग्राम है, जबकि भारत में यह 2 से 2.5 टन तक बताया गया है। कंपनी की एक टीम ने हाल ही में तंजानिया का दौरा किया था। टीम ने पाया कि वहां खेती से जुड़े कौशल का स्तर कम है और कृषि मशीनों का इस्तेमाल भी बहुत सीमित है। कंपनी भारतीय कृषि तकनीक और अनुभव के जरिए इन कमियों को दूर करने में मदद करना चाहती है।
इसके लिए कंपनी स्थानीय स्तर पर कृषि उपकरण, ट्रैक्टर और मशीनों के पुर्जे बनाने की योजना बना रही है। इससे उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है। कंपनी कृषि उपकरण बनाने और बेचने के लिए कुछ कंपनियों के साथ बातचीत भी कर रही है।
जमीन 99 साल की लीज पर देने की पेशकश
कंपनी ने तंजानिया को अपने पहले विदेशी निवेश गंतव्य के रूप में चुना है। इसकी वजह वहां बड़े भू-क्षेत्र की उपलब्धता और अनुकूल जलवायु बताई गई है। कंपनी के अनुसार, तंजानिया सरकार रियायती दरों पर 99 साल की लीज के लिए 7 लाख हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने की पेशकश कर रही है। कृषि और पशुपालन से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में सरकार संयुक्त उद्यम भागीदार भी बनेगी।
इस निवेश की शुरुआती राशि कंपनी अपने आंतरिक संसाधनों से जुटाएगी। इसके अलावा, वह रियायती ब्याज दरों पर बैंक ऋण लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ लाने की संभावना पर भी चर्चा हुई है, लेकिन खंडेलवाल ने इसे अभी शुरुआती चरण में बताया।
तंजानिया ने निवेश प्रस्ताव का स्वागत किया
भारत में तंजानिया की उच्चायुक्त अनिसा के. म्बेगा ने इस निवेश प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी तंजानिया में कृषि, खाद्य तेल, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को आगे बढ़ा सकती है। उनके मुताबिक, इस सहयोग से नई तकनीक आएगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय लोगों के कौशल में सुधार होगा और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
कंपनी का मानना है कि तंजानिया के कृषि संसाधनों और भारत की तकनीक व प्रसंस्करण क्षमता को जोड़कर एक एकीकृत कारोबार तैयार किया जा सकता है। इससे तंजानिया पूर्वी अफ्रीका के व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का केंद्र भी बन सकता है।
सरसों के कारोबार से शुरू हुई थी कंपनी
बीएल एग्रो की शुरुआत सरसों के कारोबार से हुई थी। अब यह खाद्य तेल और अन्य खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में बड़ा नाम बन चुकी है। कंपनी के प्रमुख ब्रांड ‘बैल कोल्हू’ और ‘नourish’ हैं। समूह की दो सहायक कंपनियां भी हैं। लीड्स कनेक्ट सर्विसेज कृषि तकनीक, आंकड़ों के विश्लेषण और जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में काम करती है।
वहीं, लीड्स जेनेटिक्स पशुओं की आनुवंशिकी, रोग-मुक्त पशुधन और जलवायु के अनुकूल पशु झुंड विकसित करने पर काम करती है। तंजानिया में प्रस्तावित निवेश के जरिए कंपनी खाद्य तेल से आगे बढ़कर डेयरी, कृषि तकनीक और कृषि उपकरण निर्माण में भी अपना कारोबार फैलाना चाहती है।
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