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EL NINO: ग्रामीण भारत में कर्ज देने से हिचक रहीं NBFCs, ऋण बांटने की रफ्तार पर नियंत्रण का फैसला...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 26 Oct 2026 11:23 AM IST
सार

कमजोर मानसून के बीच गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने ग्रामीण इलाकों में लोन देने को लेकर सतर्कता बढ़ाई।
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कर्ज चुकाने की क्षमता पर असर की आशंका।
श्रीराम फाइनेंस ने लोन वितरण की विकास दर का लक्ष्य घटाकर 15 से 17 प्रतिशत किया।
महिंद्रा फाइनेंस ने 282 जिलों को सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा, कुछ इलाकों में लोन वितरण घटाया।
रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, कमजोर मानसून का असर आने वाली तिमाहियों में ग्रामीण कर्ज की गुणवत्ता पर दिख सकता है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने लोन की सप्लाई को नियंत्रित करने का फैसला लिया है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने लोन की सप्लाई को नियंत्रित करने का फैसला लिया है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने कमजोर मानसून और अल नीनो की चुनौती को देखते हुए ग्रामीण भारत में लोन देने के लिए सतर्क रुख अपना लिया है। कम बारिश के कारण किसान आय से ग्रामीणों की लोन चुकाने की क्षमता तक पर खराब असर पड़ने के आसार हैं। यही कारण है कि इन कंपनियों ने कम बारिश वाले क्षेत्रों की निगरानी और लोन वितरण की रफ्तार को नियंत्रित करने का फैसला लिया है।

श्रीराम फाइनेंस, महिंद्रा फाइनेंस, एलएंडटी फाइनेंस और एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी सितंबर वाली तिमाही के वित्तीय नतीजों के दौरान बताया कि पश्चिमी और दक्षिणी भारत के सूखा प्रभावित हिस्सों में भौगोलिक स्तर पर जोखिम देखा जा रहा है। हालांकि, कंपनियों ने यह भी साफ किया है कि ग्रामीण स्तर पर क्रेडिट क्वालिटी में बड़े पैमाने पर कोई गिरावट नहीं आई है, लेकिन बारिश की कमी के कारण वे कर्ज देने में ज्यादा सावधानी बरत रही हैं।

एक तरफ कमजोर मानसून, दूसरी ओर महंगाई में तेजी
एक तरफ मानसून 2026 साल 2015 के बाद सबसे कमजोर रहा। दूसरी तरफ कई कारकों से महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। भारत में खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हुई, जो अगस्त में 4.83 प्रतिशत थीष। वहीं, खुदरा महंगाई 5.97 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत पहुंच गई।

कुल लोन में बढ़त को घटाया 
आम लोगों, छोटे उद्यमों और स्वरोजगार करने वालों को लोन देने के मामले में सबसे बड़ी रिटेल NBFC श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड ने अपने लोन देने की विकास दर को 18 प्रतिशत घटाकर 15 से 17 प्रतिशत कर दिया है।  कंपनी के अधिकारी का कहना है कि कमजोर मानसून की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित राजयों में महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना शामिल है, जहां कंपनी की अच्छी मौजूदगी है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन कम होने से आय और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जिससे कुछ कर्जदारों को समय पर किस्त चुकाने में परेशानी हो सकती है।

लोन वापसी में जोखिम बढ़ा
कंपनी की जुलाई से सितंबर महीने में बांटे गए लोन की फंसने की दर जुलाई से सितंबर महीने के दौरान बढ़कर 4.65% हो गया, पिछली तिमाही में यह 4.64 प्रतिशत थी। यह दर स्टेज तीन का हिस्सा है। लोन 90 दिन से अधिक समय से लोन का ओवरड्यू होना, उसे इस श्रेणी में लाता है। इसी तरह सितंबर वाली तिमाही में  स्टेज 2 (लोन वापसी में जोखिम बढ़ना) परिसंपत्तियां बढ़कर 7.04% हो गईं।

कंपनियों ने सूखा प्रभावित जिलों में सख्त की वसूली
महिंद्रा फाइनेंस ने 282 जिलों को सूखा-प्रभावित वाली श्रेणी में रखा है। कंपनी ने इन इलाकों में वसूली प्रक्रिया को मजबूत किया है और कुछ तनावग्रस्त बाजारों में लोन फंडिंग को घटाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तिमाही में महिंद्रा फाइनेंस के ट्रैक्टर लोन वितरण में तिमाही आधार पर 20% की गिरावट आई है। हालांकि, कंपनी की ओवरऑल एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है और इसके ग्रॉस स्टेज-3 एसेट्स घटकर 3.4% रह गए, जो एक साल पहले 3.9% थे। उधर, एलएंडटी फाइनेंस ने भी बारिश की कमी वाले इलाकों में लोन देने की रफ्तार धीमी की है।

रेटिंग एजेंसियों का आकलन, अगली तिमाहियों में दिख सकता है असर
रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के निदेशक जिनय गाला के अनुसार, कमजोर मानसून के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अगली दो तिमाहियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर दिसंबर के बाद एसेट क्वालिटी पर दिख सकता है, जिससे माइक्रोफाइनेंस, असुरक्षित बिजनेस लोन और कुछ हद तक ट्रैक्टर फाइनेंसिंग पर दबाव आ सकता है। वहीं केयरएज रेटिंग्स के निदेशक संजय अग्रवाल के मुताबिक, सूखे की स्थिति के कारण कर्ज गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर तीसरी तिमाही के मुकाबले चौथी तिमाही में ज्यादा दिखने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इसका असर विशेष रूप से ट्रैक्टर लोन और छोटे आकार के असुरक्षित पर्सनल लोन (खासकर उपभोग लोन) पर पड़ सकता है।


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