देश में अरहर दाल की मांग पूरी करने के लिए आयात बढ़ रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान अरहर का आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 44 फीसदी बढ़कर 6.25 लाख टन हो गया। पिछले साल इसी अवधि में 4.34 लाख टन अरहर का आयात हुआ था। दूसरी ओर, पिछले दो सप्ताह में घरेलू बाजारों में अरहर और अरहर दाल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है।
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अरहर के आयात में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से खरीफ 2026 की फसल प्रभावित होने की आशंका है।
म्यांमार, मोजाम्बिक और तंजानिया से बढ़ी खरीद
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच भारत ने अलग-अलग देशों से अरहर का आयात किया। इसमें मोजाम्बिक से सबसे ज्यादा 2.29 लाख टन से अधिक और म्यांमार से 1.528 लाख टन से अधिक अरहर खरीदी गई। इसके अलावा तंजानिया से 1.10 लाख टन, सूडान से 71,808 टन और अन्य देशों से करीब 61,138 टन अरहर का आयात हुआ।
लगातार दूसरे सप्ताह गिरे दाम
IPGA की साप्ताहिक बाजार रिपोर्ट के अनुसार, 24 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में देश के प्रमुख बाजारों में देसी और आयातित अरहर के दाम लगातार दूसरे सप्ताह नीचे आए। रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार से कम कीमत पर आयात की पेशकश, रुपये की मजबूती, कमजोर मांग और बाजार में नकदी की कमी के कारण कारोबारियों ने खरीदारी सीमित रखी।
गुलबर्गा और अकोला जैसे बाजारों में अरहर दाल के दाम प्रति क्विंटल करीब 200 से 300 रुपये तक घटे। वहीं, मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम में प्रति क्विंटल 50 से 150 रुपये तक की मामूली गिरावट दर्ज की गई। गिरावट का स्तर मूल देश के अनुसार अलग-अलग रहा।
सूखे से अरहर की फसल पर संकट
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति के कारण अरहर की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। IPGA के अनुसार, खरीफ फसल कम रहने की आशंका के चलते बाजार में किसान और कारोबारी बड़े पैमाने पर माल बेचने से बच रहे हैं। अफ्रीकी देशों से आयात भी उम्मीद से कम रहने की बात कही गई है।
कर्नाटक के सूखा प्रभावित कलबुर्गी क्षेत्र में किसान खड़ी अरहर की फसल को बचाने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहां के एक किसान के मुताबिक, फसल को दोबारा संभलने के लिए कम से कम एक-दो दौर की बारिश जरूरी है। हालांकि, जिन खेतों में अरहर की बुवाई हुई है, वहां फसल की स्थिति बारिश पर निर्भर करेगी।
अरहर की बुवाई का रकबा बढ़ा
सूखे और फसल को लेकर चिंता के बावजूद खरीफ 2026 में अरहर का कुल बुवाई क्षेत्र बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अरहर की बुवाई 47.25 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 45.95 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई क्षेत्र में करीब 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, केवल रकबा बढ़ने से उत्पादन बढ़ना तय नहीं है। फसल की पैदावार पर बारिश, मिट्टी में नमी और मौसम की स्थिति का भी असर पड़ेगा। ऐसे में आने वाले समय में अरहर की उपलब्धता और कीमतों पर मौसम की भूमिका अहम रह सकती है।
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