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दिल्ली देहात में चला खेत बचाओ अभियान: किसानों को गेहूं और सरसों की बेहतर पैदावार के बताए तरीके

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 28 Oct 2026 01:45 PM IST
सार

दिल्ली के काजीपुर गांव में खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं की उन्नत किस्मों, सरसों में कीट प्रबंधन, संतुलित खाद और प्राकृतिक खेती की जानकारी दी।

दिल्ली देहात में चला खेत बचाओ अभियान
दिल्ली देहात में चला खेत बचाओ अभियान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन में फसलों की बेहतर पैदावार और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए दिल्ली देहात में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), उजवा की ओर से 27 अक्टूबर को काजीपुर गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं और सरसों की फसलों के बेहतर प्रबंधन, संतुलित खाद के इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी दी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से देशभर में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों तक नई कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है, ताकि किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर सकें।

दिल्ली के 25 स्थानों पर किसानों से सीधा संवाद
इस अभियान के तहत KVK उजवा ने दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तरी जिलों में 25 स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जगहों का चयन किया है। इन कार्यक्रमों में किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद कराया जा रहा है।

हर टीम में 4 से 5 विषय विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और नवाचार करने वाले किसानों को शामिल किया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी किसानों को नई तकनीकों और शोध पर आधारित जानकारी दे रहे हैं।

गेहूं की उन्नत किस्मों और फसल प्रबंधन की जानकारी
कार्यक्रम में किसानों को रबी सीजन के लिए गेहूं की अधिक पैदावार देने वाली उन्नत किस्मों के बारे में बताया गया। वैज्ञानिकों ने समय पर कृषि कार्य करने और फसल की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

किसानों को सरसों की फसल पर नियमित नजर रखने, कीटों और रोगों की शुरुआती पहचान करने तथा समय पर उनका प्रबंधन करने के तरीके भी बताए गए। इसका उद्देश्य फसलों को नुकसान से बचाना और बेहतर उत्पादन हासिल करने में किसानों की मदद करना है।

मिट्टी की सेहत बचाने पर जोर
वैज्ञानिकों ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जरूरत के मुताबिक और संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करना जरूरी है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने और खेती में उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन करने की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया गया। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया।

खेत तक पहुंचेगी वैज्ञानिक जानकारी
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत ‘लैब टू लैंड’ यानी प्रयोगशाला से खेत तक की अवधारणा पर काम किया जा रहा है। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों और गांवों तक पहुंचकर उन्हें शोध आधारित जानकारी दे रहे हैं।

अभियान का उद्देश्य किसानों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे फसल की जरूरत के अनुसार खेती के तरीके अपना सकें। इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने, कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और रबी फसलों की पैदावार सुधारने में मदद मिल सकती है।
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