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Saffron Crop: कश्मीर में बारिश नहीं, पारा चढ़ा, सूखने के कगार पर केसर की फसल, बागवानों को भारी नुकसान का डर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 06 Oct 2026 02:57 PM IST
सार

  • कश्मीर में एक बार फिर केसर बागवानों पर जलवायु परिवर्तन की मार पड़ सकती है
  • घाटी में लंबे समय से बारिश न होने और तापमान में उछाल से केसर की फसल सूखे की चपेट में आ सकती है
  • रोपाई के बाद अक्तूबर-नवंबर महीने में केसर की कंदों से पौधे का पूर्ण विकास और फूल निकलते हैं
  • अक्तूबर का महीने केसर की खेती के लिए काफी अहम है, आगामी दिनों में बारिश न होने पर बागवानों को भारी नुकसान का डर सता रहा है
  • कश्मीर में करीब 20 से 25 हजार परिवार केसर की खेती पर निर्भर हैं।

 

कश्मीर में तेज गर्मी और बारिश की बेरुखी से केसर किसानों को भारी नुकसान का डर।
कश्मीर में तेज गर्मी और बारिश की बेरुखी से केसर किसानों को भारी नुकसान का डर। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन का असर केसर की खेती पर साफ तौर से दिखने को मिल रहा है। इस बार लंबे समय से बारिश न होने और अधिक तापमान ने खासतौर से पुलवामा और बडगाम जिले के करेवा पठारी क्षेत्रों में सैकड़ों हेक्टेयर में लगी केसर फसल को सूखे की चपेट में लाने की कगार पर पहुंचा दिया है।

अक्तूबर का तापमान 1935 के बाद दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर
कश्मीर में सितंबर महीने से ही मौसम सूखा बना हुआ है, वहीं, अक्तूबर में तापमान काफई ज्यादा बढ़ गया है। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद के अनुसार, श्रीनगर में 4 अक्तूबर को अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 1935 के बाद अक्तूबर महीने में दर्ज किया गया यह दूसरा सबसे अधिक तापमान है। IMD के अधिकारी डॉ. अहमद ने बताया कि 5 अक्तूबर को श्रीनगर का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है।

नमी की कमी से सूख रहे केसर के बीज 
ज्यादा तापमान के बीच मिट्टी  में नमी बनाए रखना केसर किसानों के लिए चुनौती बन गई है। छह कनाल से अधिक जमीन पर केसर उगाने वाले किसान अली मोहम्मद कहते हैं कि उन्होंने पानी के लिए अपने खेत के बीच में एक कुआं खोदा है, जिससे पानी निकल आया है। अब वे अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने की योजना बना रहे हैं। अली मोहम्मद के अनुसार, लगातार गर्मी और नमी की कमी के कारण केसर के कंद सूखने लगे हैं।

बारिश नहीं होने पर भारी नुकसान की आशंका
केसर फसल के विकास के लिए अक्तूबर का महीना काफी अहम है। इस महीने में अच्छे विकास के लिए  नमी काफी अहम है, जबकि लंबे समय तक सूखा रहने से फसल तनाव में आ जाती है और खराब हो सकती है। आगामी दिनों में बारिश न होने पर केसर किसानों को भारी नुकसान का डर है। 

25 हजार परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
कश्मीर में केसर की खेती 20 से 25 हजार परिवारों की आमदनी का अहम माध्यम है। यहां सालाना आमतौर पर 12 से 14 टन केसर का उत्पादन होता है। लेकिन, अब किसानों को एक और खराब सीजन का डर सता रहा है। बीते् सालों में कश्मीर के केस उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिली है, जिसके पीछे जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाला नुकसान प्रमुख कारण है। 


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