जुलाई से सिंतबर महीने तक की तिमाही के दौरान एक तरफ वैश्विक बाजार में फसलों की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली, दूसरी तरफ भारत में कमजोर मानसून और विदेश में बढ़ते तापमान ने फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग में कमजोरी देखने को मिली है। यह जानकारी जेफरीज की ताजा इंडिया केमिकल्स सितंबर 2026 रिपोर्ट में सामने आई है।
गेहूं से लेकर मक्के तक की कीमतों में उछाल, युद्ध बना कारण
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर की तिमाही में पिछले साल के मुकाबले गेहूं की कीमतों में 30 प्रतिशत, सोयाबीन के भाव में 22 प्रतिशत और मक्के के रेट में 19 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। कीमतों में इस उछाल के पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध को अहम कारण माना जा रहा है, जिसने साला सागर क्षेत्र में सप्लाई को बाधित किया है। वही, अमेरिका-ईरान तनाव ने भी फसलों की कीमतों में तेजी लाने का काम किया है।
चीन का फसल सुरक्षा उत्पादों का निर्यात गिरा, मांग में सुस्ती
रिपोर्ट में कृषि रसायनों की मांग में आई सुस्ती को साबित करने के लिए चीन का हवाला दिया गया है। चीन से होने वाले फसल सुरक्षा रसायनों के निर्यात में 15 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, 2.5 साल की बढ़त के बाद यह गिरावट वैश्विक बाजार में खाद, कीटनाशक, खरपतवार नाशक जैसे फसल सुरक्षा उत्पादों की कमजोर मांग को दिखाती है।
यूरिया का कीमतों में आई नरमी
अमेरिका-ईरान युद्ध ने खाद की सप्लाई चेन पर काफी भुरा असर डाला था। इस दौरान यूरिया जैसी प्रमुख खाद के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। हालांकि यह रिपोर्ट खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले दूसरे उत्पादों की सप्लाई चेन में सुधार की बात कह रही है। बीते साल के मुकाबले ग्लाइफोसेट के दाम 5 प्रतिशत और डीएपी (DAP) खाद के दाम 3 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि यूरिया की कीमतों में 2 प्रतिशत की कमी आई है।
भारतीय कंपनियों की कमाई पर असर संभव
जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, इस कमजोर मांग का असर भारतीय कृषि रसायन कंपनियों की सितंबर तिमाही की कमाई पर भी पड़ेगा। निर्यात और घरेलू मांग दोनों के कमजोर रहने के कारण पीआई इंडस्ट्रीज की कुल कमाई में 8 प्रतिशत और परिचालन लाभ में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है।
रसायनों की कमजोर मांग के कारण यूपीएल की कमाई 5 प्रतिशत और परिचालन लाभ 6 प्रतिशत तक गिर सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में कमजोर मानसून की वजह से यूपीएल की बिक्री में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, कंपनी की स्टॉक नीति में हुए बदलावों के कारण लैटिन अमेरिका में भी इसकी बिक्री काफी घटने की संभावना है।