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अलविदा नाना पाटेकर : किसान परिवारों के लिए बड़ा सहारा थे 'नाना', 500 विधवाओं को ऐसे दिलाया मुफ्त इलाज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 08 Oct 2026 04:42 PM IST
सार

  • नाना पाटेकर की पहल से करीब 500 किसान विधवाओं को ‘आरोग्य कार्ड’ मिले।
  • कार्ड के जरिए महिलाओं को MGM अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा मिली।
  • करीब पांच साल तक महिलाओं का मुफ्त इलाज किया गया।
  • नाना पाटेकर ने मकरंद अनासपुरे के साथ 2016 में नाम फाउंडेशन शुरू किया था।

किसान परिवारों के लिए बड़ा सहारा थे 'नाना'
किसान परिवारों के लिए बड़ा सहारा थे 'नाना' - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अभिनेता नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज तक सीमित नहीं थी। वह महाराष्ट्र के उन किसान परिवारों की मदद के लिए भी आगे आए, जिन्होंने आत्महत्या में अपने परिजनों को खोया था। मराठवाड़ा की करीब 500 किसान विधवाओं के लिए ‘आरोग्य कार्ड’ की पहल इसका उदाहरण है।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नाना पाटेकर ने 2016-17 में किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुविधा दिलाने के लिए ‘आरोग्य कार्ड’ देने का विचार रखा था। ये कार्ड नाम फाउंडेशन के जरिए करीब 500 महिलाओं को दिए गए। इन कार्ड के माध्यम से महिलाएं छत्रपति संभाजीनगर के महात्मा गांधी अस्पताल (MGM) में कई बीमारियों का मुफ्त इलाज करा सकती थीं।

पांच साल तक मिला मुफ्त इलाज
MGM विश्वविद्यालय की वरिष्ठ अधिकारी और पत्रकारिता विभाग की प्रमुख डॉ. रेखा शेलके ने नाना पाटेकर की इस पहल को याद करते हुए बताया कि MGM कैंपस और अस्पताल का नाम फाउंडेशन के साथ शुरुआत से ही जुड़ाव रहा है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल ने इन महिलाओं को करीब पांच साल तक मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। नाना पाटेकर किसान परिवारों के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे और चाहते थे कि पति की मौत के बाद परिवार की महिलाओं को इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

बच्चों की पढ़ाई में भी मदद
यह पहल सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही। डॉ. शेलके के मुताबिक, MGM विश्वविद्यालय ने किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की दिशा में भी कदम उठाया। इस तरह नाना पाटेकर की पहल ने किसान परिवारों को स्वास्थ्य और शिक्षा, दोनों स्तरों पर सहारा देने का काम किया।

2016 में शुरू किया था नाम फाउंडेशन
नाना पाटेकर ने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर वर्ष 2016 में नाम फाउंडेशन की शुरुआत की थी। संस्था ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त और किसान संकट से प्रभावित इलाकों में काम किया। मराठवाड़ा भी लंबे समय से सूखे और किसान आत्महत्या की समस्या से जूझता रहा है।

छात्रों से मिलने को तुरंत तैयार हो गए थे नाना
डॉ. रेखा शेलके ने नाना पाटेकर की MGM विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अंकुशराव कदम से मुलाकात का भी किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि करीब छह-सात महीने पहले नाना उनसे मिलने कैंपस आए थे। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई।

शेलके ने जब नाना से छात्रों से मिलने के लिए पूछा तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी। अचानक नाना पाटेकर को अपने बीच देखकर छात्र भी हैरान रह गए। नाना पाटेकर ने ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘खामोशी’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई। 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित आवास पर उनका निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका है।
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