विज्ञापन
Home Khabar Junction Rajasthan Plans Underway To Cultivate Moth Bean Abroad Agricultural University Sends Over 70 Genotypes For R

Rajasthan: मोठ की फसल विदेश में उगाने की तैयारी, कृषि विश्वविद्यालय ने शोध के लिए भेजे 70 से ज्यादा जीनोटाइप

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 21 Sep 2026 11:12 AM IST
सार

  • स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने मोठ के 70 से अधिक जीनोटाइप विदेश भेजे हैं।
  • इनका अलग-अलग जलवायु, सीमित पानी और बदलते तापमान में परीक्षण होगा।
  • मोठ की फसल सूखे क्षेत्रों में किसान आय और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।
  • परीक्षण सफल होने पर विदेश में मोठ उत्पादन का रास्ता खुल सकता है। 
  • परियोजना किर्कहाउस ट्रस्ट, यूके और आईसीएआर के सहयोग से चल रही है।
  • राजस्थान में करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोठ की खेती होती है।
  • विश्वविद्यालय ने मोठ की 8 से 10 उन्नत किस्में विकसित की हैं।

भारतीय मोठ विदेश में परखी जाएगी।
भारतीय मोठ विदेश में परखी जाएगी। - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने मोठ के 70 से अधिक जीनोटाइप अनुसंधान और परीक्षण के लिए विदेशों में भेजे हैं। यह परियोजना किर्कहाउस ट्रस्ट, यूनाइटेड किंगडम और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से चल रही है। इसके तहत मोठ की आनुवंशिक सामग्री को विदेश भेजकर अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी पैदावार का आकलन किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के अनुसार, परीक्षण में अलग-अलग जलवायु और बदलते तापमान में मोठ के प्रदर्शन को देखा जाएगा। अगर परीक्षण के परिणाम सफल रहते हैं तो राजस्थान में उगाई जाने वाली मोठ की खेती का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकता है।

कम बारिश में मोठ पर किसानों की निर्भरता
विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. एन.के. शर्मा के अनुसार, मोठ राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण फसल है। कम बारिश की स्थिति में, जब अन्य फसलों की संभावनाएं कमजोर हो जाती हैं, तब किसान मोठ की खेती पर निर्भर रहते हैं।

राजस्थान मोठ उत्पादन का हब
मोठ सीमित पानी में तैयार होने वाली दलहनी फसल है और प्रतिकूल मौसम को सहन करने में सक्षम है। राजस्थान में करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोठ की खेती की जाती है। विश्वविद्यालय मोठ की उन्नत किस्मों के विकास के साथ फसल प्रबंधन, पौध संरक्षण और कीट एवं बीमारियों की रोकथाम पर भी काम कर रहा है। बीज उत्पादक संस्थाओं को प्रजनक बीज और किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बीकानेरी भुजिया के लिए भी अहम मोठ
किसानों के साथ  बीकानेरी भुजिया के उत्पादन में मोठ की अहम भूमिका है। जानकारी के अनुसार, बीकानेरी भुजिया बनाने में करीब 80 प्रतिशत मोठ का इस्तेमाल होता है। ऐसे में मोठ का उत्पादन प्रभावित होने पर भुजिया के उत्पादन और कीमत पर भी असर पड़ता है।

कई किस्मों का हुआ विकास
विश्वविद्यालय की मोठ परियोजना के तहत अब तक 8 से 10 उन्नत किस्में विकसित की जा चुकी हैं। इनमें आरएम-225, आरएम-257 और आरएम-435 प्रमुख हैं। हाल में विकसित आरएम-2251 किस्म बीकानेर और राज्य के अन्य शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी पाई गई है। इसके अलावा म्यूटेशन ब्रीडिंग तकनीक से ऐसी किस्म भी विकसित की गई है, जो 70 दिन से कम समय में तैयार हो जाती है। यह किस्म सीमित बारिश वाले क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन