बीते हफ्तों में चीनी की कीमतों (Sugar Prices) में तेजी को देखते हुए देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन राज्यों से आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने के खरीद भाव (FRP) को बढ़ाने की मांग उठी है। इसी कड़ी में हरियाणा के एक किसान संगठन अखिल भारतीय किसान सभा का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और कम आमदनी की वजह से प्रदेश के किसानों का गन्ना की ओर रुझान कम हुआ है। उनका कहना है कि किसानों को पर्याप्त लाभ देना जरूरी है। संगठन ने गन्ने के एफआरपी को 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई है।
आंदोलन के चेतावनी
19 सितंबर को गोहाना में गन्ना किसानों की राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया, जिसमें किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति का खाका खींचा। इस पहल के तहत सबसे पहले किसान सहाकरिता मंत्री और सीएम से मिलकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे। मांग पूरी नहीं होने पर किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
मिलें ड्रोन उपलब्ध कराएं, नुकसान पर मिले पर्याप्त मुआवजा
किसानों की मांग मात्र FRP को बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मिलों की ओर से कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं, जलभराव या रोग की वजह से फसल खराब होने पर पर्याप्त मुआवजे और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने गन्ने की कटाई के लिए मशीनें उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि गन्ने की आपूर्ति में देरी और पर्याप्त कीमत नहीं मिलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गन्ना किसानों को चीनी पहले की तरह नियंत्रित दरों पर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
गांव-गांव अभियान चलाने का फैसला
रोहतक में हाल में हुई अखिल भारतीय किसान सभा की हरियाणा राज्य समिति की बैठक में किसानों की मांगों को लेकर गांव-गांव अभियान चलाने और विधायकों को ज्ञापन देने का फैसला किया गया। बैठक में गन्ने का भाव बढ़ाने के अलावा व्यापार समझौते को रद्द करने और बिजली वितरण में निजी लाइसेंस का विरोध करने की मांग भी उठाई गई। 2 अक्टूबर से गांवों में पंचायतें आयोजित करने का फैसला भी लिया गया।
किसान सभा के राज्य अध्यक्ष बलबीर सिंह के अनुसार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गिरदावरी कराने और फसल नुकसान का पर्याप्त मुआवजा देने की मांग भी रखी गई है। किसानों ने लंबित मुआवजा और बीमा दावों का भुगतान करने की मांग भी की है।