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Home Khabar Junction Paddy Farmers Stay Alert Risk Of Up To 60 Crop Loss Due To This Pest Here Is How To Protect Your Crop

Paddy Advisory: धान किसान अलर्ट रहें, इस कीट से 60% तक नुकसान का खतरा, ऐसे करें बचाव...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 21 Sep 2026 11:24 AM IST
सार

  • उत्तर भारत के कई धान उत्पादक राज्यों से फसल में सफेद माहू कीट के प्रकोप की खबरे सामने आई हैं।
  • जानकारों के अनुसार यह कीट धान की पैदावार को 60 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है।
  • पत्तियों के नीचे छोटे सफेद कीट और चिपचिपा पदार्थ से इसकी पहचान हो सकती है।
  • जलभराव और खेत में अधिक नमी से कीट का प्रसार तेजी से होने की बात कही गई है।

धान किसान माहू कीट को लेकर सतर्क रहें।
धान किसान माहू कीट को लेकर सतर्क रहें। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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धान की फसल में माहू कीट का प्रकोप किसानों को बड़ा नुकसान दे सकती है। जानकार बताते हैं कि यह कीट धान उपज को 60 प्रतिशत तक नीचे लुढ़का सकता है। मध्य प्रदेश समेत कई धान उत्पादक राज्यों से माहू कीट के प्रकोप की खबरे सामने आई हैं।

रस चूसकर पौधों को करता है कमजोर
कृषि विभाग, शहडोल के मुख्य सुरक्षा अधिकारी सुरेश चंद्र के अनुसार, सफेद माहू धान के पौधों के तनों और पत्तियों से रस चूसता है। इससे पौधे कमजोर होने लगते हैं। रस सूखने के कारण पौधे पीले पड़ जाते हैं और कुछ दिनों में सूखकर नष्ट हो सकते हैं। पौध संरक्षण केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, सफेद माहू फसल की शुरुआती और मध्य दोनों अवस्थाओं में हमला कर सकता है। समय पर इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं होने पर पूरे खेत की फसल प्रभावित हो सकती है।

पत्तियों के नीचे दिखते हैं सफेद कीड़े
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. अखिलेश वर्मा के अनुसार, किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण कर सफेद माहू की पहचान कर सकते हैं। पत्तियों की निचली सतह पर छोटे-छोटे सफेद कीड़े जमा दिखाई देते हैं। पौधे को हिलाने पर ये कीड़े उड़ने लगते हैं। डॉ. वर्मा के अनुसार, फसल पर चिपचिपा पदार्थ दिखाई देना भी कीट के प्रकोप का प्रमुख संकेत है। इसके प्रभाव से पौधा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया ठीक से नहीं कर पाता, जिससे धान के दाने पूरी तरह खोखले रह सकते हैं।

जलभराव से बचें, समय पर करें नियंत्रण
कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. नवीन कुमार ने किसानों को खेतों में जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी है। उनके अनुसार, खेत में लगातार नमी रहने से सफेद माहू तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए खेत से पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने को कहा गया है। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर अनुशंसित रसायन इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथॉक्सम के छिड़काव की सलाह दी गई है। कृषि विभाग की एडवाइजरी के अनुसार, जैव कीटनाशक के तौर पर नीम के तेल के घोल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। किसानों को खेतों की मेड़ों की सफाई रखने और समय-समय पर फसल की जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि शुरुआती स्तर पर ही कीट की पहचान कर नियंत्रण किया जा सके।
 
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