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MP: 126 गांवों में बदलेगा खेती का तरीका, दही माइक्रो-लिफ्ट सिंचाई परियोजना ट्रायल के चरण में, जानें फायदे...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 18 Oct 2026 05:54 PM IST
सार

दही माइक्रो-लिफ्ट सिंचाई परियोजना का निर्माण पूरा, ट्रायल का दौर जारी
इस परियोजना से धार और अलीराजपुर के 126 गांवों को लाभ मिलेगा
अच्छी सिंचाई की सुविधा होने से यहां फसल विविधीकरण को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
कुल 47 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा

मध्य प्रदेश के 126 गांवों को मिलने वाली है सिंचाई की मजबूत सुविधा।
मध्य प्रदेश के 126 गांवों को मिलने वाली है सिंचाई की मजबूत सुविधा। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर बने दही माइक्रो-लिफ्ट सिंचाई परियोजना इस समय परीक्षण के चरण में है। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना का काम 30 जून 2026 को पूरा हो गया था। इस सिंचाई परियोजना की मदद से धार और अलीराजपुर जिले के किसानों को ,सिंचाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

126 गांवों को मिलेगी सिंचाई की सुविधा
यह परियोजना धार और अलीराजपुर जिले के कुल 126 गांवों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाएगी। इस तरह लगभग 1,26 लाख किसानों को  फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इस परियोजना के तहत कतारखेड़ा गांव के पास पानी को लिफ्ट कर जमीन के अंदर बने पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

इस परियोजना में पांच पंप हाउस, 58 किलोमीटर लंबी मेन पाइपलाइन और 3,475 किलोमीटर लंबा वितरण पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है। यह परियोजना कुक्षी, दही, जोबट, सोंडवा और अलीराजपुर तहसीलों के क्षेत्रों को कवर करेगी। इसे चलाने के लिए कुक्षी और जोबट में सब-स्टेशनों के माध्यम से 58.87 मेगावाट बिजली की व्यवस्था की गई है।

रबी की फसलों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के अनुसार, यह परियोजना लगभग 47 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी, जिससे रबी फसलों के लिए किसानों की बारिश पर निर्भरता कम होगी। इससे मुख्य रूप से गेहूं, चना, सब्जियों और चारे की फसलों की पैदावार में सुधार होगा।

आदिवासी क्षेत्रों में फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल से खासतौर से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की उम्मीद है। निर्माण पूरा होने के बाद, संबंधित एजेंसी अगले पांच वर्षों तक परियोजना के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी ताकि सिंचाई प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करती रहे। 


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