केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि अल नीनो, सूखे और बाढ़ जैसी चुनौतियों के बावजूद 2026-27 फसल वर्ष में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल देश में बारिश की कमी लगभग 12 प्रतिशत है। उन्होंने साफ किया कि बारिश की कमी को 20 प्रतिशत से ज्यादा होना आमतोर पर सूखे की श्रेणी में गिना जाता है।
रबी सीजन का लक्ष्य और तैयारी
रबी सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने रबी के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार अप्रैल से ही व्यापक तैयारी कर रही है और रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। देश में कुल उर्वरक आवश्यकता 380 लाख टन अनुमानित है, जिसके मुकाबले वर्तमान स्टॉक 163 लाख टन से अधिक है।
फसलों की स्थिति और राज्यों पर प्रभाव
चौहान ने बताया कि धान के रकबे में लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जबकि मक्का, सोयाबीन और कपास का क्षेत्र भी घटा है। हालांकि, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर के रकबे में वृद्धि हुई है, जो दलहन और मोटे अनाजों की ओर किसानों के बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रभावित राज्यों के आकलन के लिए केंद्रीय टीमें भेजी जा रही हैं। उन्होंने स्वयं भी प्रभावित राज्यों का दौरा करने की बात कही है।
पराली जलाना प्रदूषण का प्राथमिक कारण नहीं
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के आरोपों पर मंत्री ने किसानों का पक्ष लेते हुए कहा कि यह कहना गलत और अनुचित है कि प्रदूषण का प्राथमिक कारण पराली जलाना है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अन्य स्रोतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए और किसानों को केवल इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर परेशान नहीं किया जाना चाहिए।