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Home› Khabar Junction› Lack Of Storage Leads To The Wastage Of Lakhs Of Tonnes Of Onions And Soybeans Annually Farmers Suffer Losses

भंडारण की कमी से हर साल लाखों टन प्याज-सोयाबीन बर्बाद : किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान, ऐसे होगा सुधार...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 29 Sep 2026 05:29 PM IST
सार

  • मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में फसल कटाई के बाद नुकसान का आकलन
  • सालाना 16.89 लाख टन प्याज का नुकसान
  • सोयाबीन का 4.16 लाख टन और सीताफल का 7,793 टन नुकसान
  • प्याज, सोयाबीन और सीताफल से जुड़ी हजारों करोड़ की आर्थिक हानि
  • रिपोर्ट में भंडारण, तकनीक और किसान सहायता सुधारने का सुझाव

भंडारण की कमी से लाखों टन प्याज-सोयाबीन बर्बाद।
भंडारण की कमी से लाखों टन प्याज-सोयाबीन बर्बाद। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भंडराण और रखरखाव में कमी की वजह से प्याज, सोयाबीन और सीताफल की गुणवत्ता पर खराब असर पड़ रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थीक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह बात डब्ल्यूआरआई इंडिया की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन फसलों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान का आकलन किया गया है।

इस अध्ययन को डब्ल्यूआरआई इंडिया ने बीआईएफ (BAIF) डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन, सामुन्नति और सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट के साथ मिलकर तैयार किया है। इसमें 2023 से 2024 के बीच कटाई, छंटाई, परिवहन, भंडारण और रखरखाव के दौरान होने वाले नुकसान का ब्यौरा दिया गया है।

साल में लाखों टन प्याज-सोयाबीन का नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन में शामिल जिलों में सालाना आधार पर प्याज का 16.89 लाख टन, सोयाबीन का 4.16 लाख टन और सीताफल का 7,793 टन का नुकसान हो रहा है।

2,711 करोड़ रुपये की प्याज बर्बाद
इस बर्बादी का आर्थिक मूल्य भी चौंकाने वाला है। प्याज के नुकसान से लगभग 2,711 करोड़, सोयाबीन से 2,087 करोड़ और सीताफल से 20 करोड़ की आर्थिक हानि हो रही है। इसके अलावा, इन फसलों के खराब होने से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हो रहा है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है।

रबी प्याज के लिए भंडारण चुनौती, सोयाबीन की कटाई-थ्रेशिंग में सबसे ज्यादा नुकसान
वर्किंग पेपर के अनुसार, रबी प्याज के मामले में सबसे बड़ी समस्या भंडारण (स्टोरेज) की है। सही तरीके से सुखाने के अभाव और हवादार भंडारण केंद्रों की कमी से प्याज में सड़न और अंकुरण की समस्या पैदा होती है। सोयाबीन की कटाई और थ्रेशिंग के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान होता है। गलत तरीके से सेट की गई कंबाइन हार्वेस्टर, बेमौसम बारिश से नमी का सोखना और फफूंद लगने के कारण सोयाबीन बर्बाद हो रहा है।  कटाई के दौरान सावधानी की कमी, धूप में रखने से गर्मी का तनाव (हीट स्ट्रेस) और छंटाई व पैकिंग के दौरान होने वाली यांत्रिक चोटें इसके खराब होने के मुख्य कारण हैं।

प्याज से उत्सर्जन सबसे ज्यादा
रिपोर्ट बताती है कि सोयाबीन के नुकसान से सबसे अधिक प्रोटीन की हानि (1.47 लाख टन) होती है। इसलिए, विशेषज्ञों ने सोयाबीन आपूर्ति श्रृंखला में सुधार को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। प्याज के मामले में भंडारण के दौरान कार्बोहाइड्रेट का नुकसान काफी अधिक है। पर्यावरण के लिहाज से, प्याज की बड़ी मात्रा खुले में फेंक दी जाती है, जिससे उत्सर्जन सबसे अधिक होता है।

फसल कटाई के बाद के चरण से जुड़ी तकनीक किसान तक पहुंचे
डब्ल्यूआरआई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति को सुधारने के लिए तीन प्राथमिकताओं पर ध्यान देने का सुझाव दिया गया है, जिसमें कटाई के बाद वाले चरणों में काम आने वाली तकनीकों को किसानों तक पुहंचाना शामिल है। इसके अलावा रिपोर्ट भंडारण और बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ किसानों को वित्तीय सहायता और सही जानकारी उपलब्ध कराने की वकालत करती है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि फसल कटाई के बाद के प्रबंधन को सरकार की मौजूदा विस्तार और किसान सहायता प्रणालियों के साथ मजबूती से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जा सके।


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