छत्तीसगढ़ में हल्दी बीज वितरण में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने जांच शुरू कर दी है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश पर उद्यानिकी विभाग ने संचालनालय स्तर पर जांच टीम गठित की है। साथ ही किसानों के खेतों में हल्दी की फसल और खेती के वास्तविक रकबे का पता लगाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने को कहा गया है। जांच और सत्यापन पूरा होने तक योजना के तहत अनुदान भुगतान की प्रक्रिया रोक दी गई है।
यह मामला वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के तहत हल्दी की खेती का रकबा बढ़ाने के कार्यक्रम से जुड़ा है। योजना में हल्दी बीज वितरण को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे हैं।
बीज वितरण से लेकर अनुदान तक की होगी जांच
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालनालय ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को किसानों के हिसाब से पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें किसानों को वितरित हल्दी बीज की मात्रा, बीज आपूर्ति करने वाली संस्थाओं की ओर से दिए गए बीज की मात्रा और गुणवत्ता तथा किसानों को भुगतान की गई अनुदान राशि का विवरण शामिल है।
विभाग ने हल्दी बीज रोपण से जुड़े दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड और फसल के भौतिक सत्यापन से संबंधित जानकारी भी मांगी है। इन दस्तावेजों के आधार पर शिकायतों की जांच की जाएगी और रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
डिजिटल सर्वे से पता चलेगा कितना है हल्दी की खेती का रकबा
जांच में यह भी देखा जाएगा कि किसानों ने वास्तव में कितने क्षेत्र में हल्दी की खेती की है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रकबा वास्तविक स्थिति से मेल खाता है या नहीं। इसके लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्यापन के दौरान बीज वितरण के रिकॉर्ड, आपूर्तिकर्ता संस्थाओं के विवरण, बिल, पंजीयन टैग और खेतों में मौजूद फसल की जांच की जाएगी। किसानों के खेतों में लगाई गई हल्दी की फसल के जीपीएस आधारित फोटो भी मांगे गए हैं।
डिजिटल साक्ष्यों और विभागीय दस्तावेजों का मिलान कर यह पुष्टि की जाएगी कि योजना के तहत दर्ज जानकारी सही है या नहीं। यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
1,300 हेक्टेयर में हल्दी की खेती बढ़ाने का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य पोषित योजना के तहत 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती का विस्तार करने का कार्यक्रम है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, अपने स्तर पर प्रमाणित हल्दी बीज की व्यवस्था कर उसकी रोपाई करने वाले पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 46,000 रुपये तक अनुदान दिया जा सकता है। इसके लिए किसानों को जिला अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होता है। इसके बाद विभागीय अमला खेत का सत्यापन करता है। पात्रता की पुष्टि होने पर अनुदान राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
हालांकि, बीज वितरण से जुड़ी शिकायतों के बाद फिलहाल भुगतान रोक दिया गया है। किसानों के दस्तावेजों, बीज की मात्रा, खेती के वास्तविक रकबे और फसल की स्थिति का सत्यापन पूरा होने के बाद ही अनुदान भुगतान पर आगे फैसला लिया जाएगा।
दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई
कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश पर शुरू की गई जांच का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पात्र किसानों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है। विभाग के अनुसार, जांच में यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित संस्था दोषी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच में हल्दी बीज वितरण, खेतों में फसल की मौजूदगी, दर्ज रकबे और अनुदान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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