महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी का असर गन्ने की फसल पर भी दिखने लगा है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) के मुताबिक, गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी में कमी के कारण आने वाले पेराई सीजन में राज्य का चीनी उत्पादन करीब 20 फीसदी घट सकता है।
WISMA के चेयरमैन भैरवनाथ थोम्ब्रे ने कहा कि महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी से कई फसलों की पैदावार प्रभावित हुई है। इसका असर गन्ने पर भी पड़ा है। उनके अनुमान के मुताबिक, राज्य में इस सीजन चीनी उत्पादन करीब 80 लाख टन रह सकता है। पिछले पेराई सीजन 2025-26 में महाराष्ट्र में करीब 99 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था।
गन्ने की पैदावार 30-40% तक घटने का दावा
थोम्ब्रे ने कहा कि राज्य में गन्ने का रकबा अच्छा है, लेकिन इस साल प्रति एकड़ गन्ने की पैदावार 30 से 40 फीसदी तक कम होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगर गन्ने की पेराई में ज्यादा देरी हुई तो उत्पादन में और गिरावट आ सकती है। इसलिए इस बार गन्ने की जल्दी पेराई शुरू करना जरूरी है।
15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने से किसानों को फायदा
उन्होंने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें इस साल चीनी मिलों में पेराई सीजन 15 अक्टूबर से शुरू करने की अनुमति दी गई है। उनका कहना है कि जल्दी पेराई होने से किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर मिल सकता है। अगर गन्ने को खेत में ज्यादा समय तक छोड़ना पड़ा तो पानी की कमी के कारण फसल सूखने का खतरा बढ़ सकता है।
मराठवाड़ा समेत कई इलाकों में स्थिति गंभीर
WISMA के अनुसार मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर और अहिल्यानगर जैसे क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। यहां करीब 45 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण कई जगह गन्ने की फसल सूखने लगी है। थोम्ब्रे ने कहा कि अगर गन्ने को जल्द से जल्द मिलों में भेजकर पेराई कर दी जाए तो किसानों को कम से कम कुछ आमदनी मिल सकती है। देरी होने पर खेत में खड़ी फसल पूरी तरह सूखने का खतरा है।
चीनी मिलों के लिए भी पानी की चिंता
बारिश की कमी का असर सिर्फ गन्ने पर ही नहीं, बल्कि चीनी मिलों के संचालन पर भी पड़ सकता है। WISMA के मुताबिक मिलों के संचालन के लिए भी पानी की जरूरत होती है और जनवरी-फरवरी में पानी की स्थिति और खराब होने की आशंका है। थोम्ब्रे ने कहा कि राज्य में सूखे जैसी स्थिति बन रही है और इस साल जलाशयों के पानी को पीने के लिए भी सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में आगे चलकर मिलों के सामने पानी की चुनौती बढ़ सकती है।
चीनी के दाम से कुछ राहत की उम्मीद
WISMA के चेयरमैन के मुताबिक, फिलहाल चीनी के दाम बेहतर हैं और दिवाली तक इनके स्थिर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि चीनी की रिकवरी कम होने से होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई बेहतर कीमत से हो सकती है। सरकार ने चीनी मिलों को तय कोटे के बजाय सीधे बाजार में चीनी भेजने की भी अनुमति दी है।
किसानों के लिए जल्दी पेराई क्यों जरूरी?
महाराष्ट्र में कम बारिश की वजह से गन्ने में नमी और वजन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में ज्यादा देरी से किसान को नुकसान हो सकता है। जल्दी पेराई होने पर किसान सूखने से पहले गन्ना मिल को भेज सकता है और फसल से कुछ आय हासिल कर सकता है। इसी वजह से चीनी मिलों और गन्ना किसानों के लिए इस बार समय पर पेराई शुरू करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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