केंद्र सरकार ग्रामीण सड़कों पर गड्ढों, दरारों और दूसरी खराबियों की पहचान के लिए एक एआई सिस्टम का परख रही है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से सामने आई है। यह सिस्टम मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए काम करेगा। इस महीने की शुरुआत से इसका देशव्यापी परीक्षण (फील्ड-वैलिडेशन) चल रहा है।
अधिकारी के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों पर इस एआई आधारित सड़क-स्थिति मूल्यांकन प्रणाली के परीक्षण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस सिस्टम को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग और राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी द्वारा मिलकर विकसित किया जा रहा है।
वर्तमान में, सड़कों के रखरखाव की निगरानी ई-मार्ग (eMARG) मोबाइल एप्लिकेशन पर फील्ड अधिकारियों द्वारा जाकर किए गए भौतिक निरीक्षण और जियो-टैग की गई तस्वीरों के माध्यम से की जाती है। अधिकारी ने बताया कि एआई मूल्यांकन से रखरखाव की जरूरतों को पहचानने में मदद मिलेगी, लेकिन इंजीनियर अपना भौतिक सत्यापन जारी रखेंगे और एआई द्वारा जुटाए गए आंकड़ों का अपने मापन से मिलान करेंगे। यदि एआई और इंजीनियर के आकलन में अंतर आता है, तो परीक्षण के दौरान उसकी जांच की जाएगी।
मौजूदा वाहनों और मोबाइल का ही होगा इस्तेमाल
अधिकारी के अनुसार, इस सिस्टम के परीक्षण के लिए अलग से जांच वाहनों का कोई नया बेड़ा नहीं बनाया गया है। प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स के पास पहले से उपलब्ध वाहनों पर मोबाइल फोन लगाकर सड़कों की स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि फील्ड की जरूरतों और उपयोगिता को देखते हुए बाद में डैशकैम लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।
इस साल की शुरुआत में पुणे, लखनऊ जिले, असम के कामरूप जिले और मेघालय के री-भोई जिले की छह सड़कों पर शुरुआती परीक्षण किए गए थे। अधिकारी के अनुसार, इसके बाद सिस्टम के एक बेहतर वर्जन का परीक्षण कानपुर जिले और भोपाल जिले के बैरसिया ब्लॉक की सात सड़कों पर किया गया। अब 1 सितंबर से व्यापक राष्ट्रीय परीक्षण शुरू हो गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ट्रायल के लिए यूनिट्स (PIU) की पहचान की है।
मंत्रालय इस बात पर भी विचार कर रहा है कि क्या प्रस्तावित तकनीक आधारित इस ढांचे के तहत हर तिमाही सड़कों का आकलन किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है। इसके साथ ही इस एआई सिस्टम को मौजूदा ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी जांच की जा रही है।
पांच साल तक ठेकेदार की ही रहेगी जिम्मेदारी
मंत्रालय ने साफ किया है कि सड़कों के रखरखाव और 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड' (खराबी दूर करने की अवधि) से जुड़े मौजूदा नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। निर्माण पूरा होने की तारीख से पांच साल तक डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड होता है। इस दौरान ठेकेदार ही खराबियों को ठीक करने और नियमित रखरखाव के लिए जिम्मेदार रहेगा। व्यापक स्तर पर इस सिस्टम का लागू होना राष्ट्रीय परीक्षण के नतीजों और आगे की मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल के अनुसार, एआई-सहायता प्राप्त मूल्यांकन से पीएमजीएसवाई के तहत ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के आकलन में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक-संचालित दक्षता आएगी। उन्होंने कहा कि सबूतों पर आधारित डेटा और व्यवस्थित मूल्यांकन से निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी। सरकार ग्रामीण सड़कों के रखरखाव की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।