चीनी के बढ़ते दाम के बीच महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई को लेकर विवाद शुरू हो गया है। किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने चीनी मिल मालिकों से नवंबर से पहले मिलें शुरू नहीं करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 15 नवंबर से पहले पेराई शुरू हुई तो ‘कांटा बंद’ आंदोलन किया जाएगा। शेट्टी ने गन्ने का भाव ₹5,000 प्रति टन, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹50 किलो और इथेनॉल का भाव ₹70 करने की मांग रखी है।
कच्चा गन्ना पेरने से किसानों को नुकसान
राजू शेट्टी ने कहा कि जल्द पेराई शुरू होने से गन्ना पूरी तरह तैयार नहीं होगा। इससे उसकी चीनी रिकवरी कम रह सकती है और गन्ने का वजन भी घट सकता है। उन्होंने बताया कि अगर गन्ने में सिर्फ 8 फीसदी रिकवरी हुई तो किसान को प्रति एकड़ बड़ा नुकसान होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने के बावजूद एथेनॉल का खरीद मूल्य नहीं बढ़ा है। इससे मिल मालिकों को भी नुकसान हो रहा है। शेट्टी ने चेतावनी दी कि अगर किसी मिल ने समय से पहले पेराई शुरू की तो ‘काटा बंद’ आंदोलन किया जाएगा, यानी गन्ने की तौल बंद कराई जाएगी।
15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह
केंद्र सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी दर के आधार पर है। केंद्र ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह दी है। सरकार का कहना है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है। इससे त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी।
हालांकि, शेट्टी का कहना है कि पेराई 15 नवंबर के बाद शुरू होनी चाहिए। उनके मुताबिक नवंबर, दिसंबर और जनवरी में गन्ने की रिकवरी बेहतर रहती है। उनका आरोप है कि केंद्र त्योहारों से पहले बाजार में नई चीनी लाने के लिए मिलों पर दबाव बना रहा है।
चीनी के दाम में तेजी
भारत में हर साल करीब 300-340 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 लाख टन है। सरकार के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को चीनी का औसत भाव 48.18 रुपये किलो था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये किलो हो गया।
सरकार ने कीमत बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी और कीमतों में तेजी जैसे कारण बताए हैं। सरकार ने चीनी को इथेनॉल बनाने में भेजे जाने को कीमत बढ़ने का कारण मानने से इनकार किया है।
इस सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन था। राजू शेट्टी ने कहा कि चीनी बाजार में उपलब्ध कराने का पूरा बोझ किसानों और मिल मालिकों पर नहीं डाला जाना चाहिए। सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे किसान और चीनी उद्योग दोनों को उचित कीमत मिल सके।
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