महाराष्ट्र के सबसे बड़े केला उत्पादक जिले जलगांव में केले के थोक भाव तेजी से गिर गए हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण निर्यात प्रभावित होने और सितंबर में कम बारिश से केले की गुणवत्ता खराब होने का असर कीमतों पर पड़ा है। खराब गुणवत्ता के केले किसानों को 5 रुपये किलो तक में बेचने पड़ रहे हैं, जबकि अच्छी गुणवत्ता के केले का भाव करीब 11 रुपये किलो रह गया है।
दाम में गिरावट से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सुळे गांव के एक किसान ने व्यापारियों से सिर्फ 3 रुपये किलो का भाव मिलने पर अपनी 4 एकड़ केले की फसल रोटावेटर से नष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि फसल तैयार करने में 7 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे। किसान के मुताबिक, केले पकने लगे थे। ऐसे में 3 रुपये किलो के भाव पर फसल बेचने से लागत निकालना भी मुश्किल था। उन्होंने कहा, “इतने कम भाव पर केले बेचना बेकार है। इसलिए पूरी फसल नष्ट कर दी।”
500 क्विंटल से ज्यादा उत्पादन, फिर भी सही भाव नहीं
किसान के खेत में करीब 500 क्विंटल से ज्यादा केले का उत्पादन हुआ था। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में केले का थोक भाव करीब 22 रुपये किलो है, जबकि जलगांव में व्यापारी बहुत कम कीमत लगा रहे हैं। उन्होंने सरकार से केला किसानों को उचित भाव दिलाने की मांग की है।
जलगांव के जिलाधिकारी रोहन घुगे के अनुसार, इससे पहले केले के थोक भाव गुणवत्ता के अनुसार 12 से 18 रुपये किलो के बीच थे। कीमतों में अचानक आई गिरावट के कारणों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसान इंगले से भी बात करेगा।
निर्यात घटा तो घरेलू बाजार में बढ़ गई आपूर्ति
एक निर्यातक के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से ही केले का निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे घरेलू बाजार में केले की आपूर्ति बढ़ गई, जबकि मांग उतनी नहीं रही। इसका सीधा असर थोक कीमतों पर पड़ा। उन्होंने बताया कि सितंबर में कम बारिश और गर्म मौसम के कारण भी केले की गुणवत्ता प्रभावित हुई। मार्च में केले का थोक भाव करीब 8 रुपये किलो तक गिर गया था, जबकि उत्पादन लागत करीब 12 रुपये किलो थी। उनके मुताबिक, अगर निर्यात लगातार जारी रहता तो घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में कीमतों को सहारा मिल सकता था।
सूखे ने किसानों की मुश्किल और बढ़ाई
एक अन्य किसान ने बताया कि जलगांव को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। पानी की कमी के कारण खेती पर संकट है और कम भाव मिलने पर कई किसान मजबूरी में अपनी उपज बेच रहे हैं। किसानों को यह भी चिंता है कि अगले सीजन में वे कितने क्षेत्र में केला लगा पाएंगे।
50 हजार से ज्यादा किसान केले की खेती पर निर्भर
जलगांव में हर साल करीब 4 करोड़ टन केले का उत्पादन होने का दावा किया गया है। जिले की छह तहसीलों में 50 हजार से ज्यादा किसान केले की खेती करते हैं। ऐसे में कीमतों में गिरावट का असर बड़ी संख्या में किसानों की आय पर पड़ रहा है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार के सांसद एकनाथ खडसे ने सरकार से केला किसानों के लिए राहत की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर केला किसानों को भी सब्सिडी देनी चाहिए।
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