सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए एक्टर वरुण धवन ने बताया कि उन्होंने एक बायोफोर्टिफाइड फार्म खरीदा है। वीडियो के कैप्शन में वरुण ने लिखा कि पता चला कि खेती तो बस शुरुआत थी। मुझे एहसास हुआ कि पोषण इस सफर का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है।
खाद्य बनाम पोषण की बहस के बीच बायोफोर्टिफिकेशन का स्थान
वर्तमान में भारत एक खाद्य संपन्न देश है, जहां खासतौर से अनाज खाद्य सुरक्षा का आधार है। हरित क्रांति के बाद भारत ने अनाज के दम पर खाद्य सुरक्षा हासिल की, लेकिन इस दौड़ में पोषण सुरक्षा पीछे छूट गई। इसी खाद्य बनाम पोषण की बहस को एक साथ लाने का काम बायोफोर्टिफिकेशन करता है। बायोफोर्टिफाइड फार्म ऐसे खेत होते हैं, जहां उगने वाली फसलों में प्राकृतिक रूप आयरन, जिंक, विटामिन, फोलेट, प्रोटीन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा पारंपरिक खेती से उगने वाली फसलों से ज्यादा होती है। दूसरे शब्दों में कहें तो बायोफोर्टिफिकेशन खेती का एक तरीका है, जिसे अपनाने वाले खेतों को बायोफोर्टिफाइड फार्म कहा जाता है।
शरीर की छिपी भूख होती है दूर
बायोफोर्टिफाइड खेती शरीर की छिपी हुई भूख (पोषक तत्वों की कमी) को दूर करने में काम आती है। खेती में बायोफोर्टिफिकेशन दो स्तर पर काम करता है, जिसमें बीज, खेती का तरीका और आधुनिक तकनीक शामिल है। पहले स्तर पर ऐसी किस्मों की बुवाई की जाती है, जिनमें ज्यादा पोषण हो। आमतौर पर इसके लिए ज्यादा उत्पादन देने वाली फसल किस्म का प्राकृतिक रूप से ज्यादा पोषण वाली किस्मों की क्रॉस का उपयोग होता है।
फसल चक्र से खास उर्वरकों तक का छिड़काव
दूसरे स्तर खेत के प्रबंधन पर फोकस करता है, जिसमें सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच करके उसमें मौजूद पोषक तत्वों का पता लगाया जाता है। इसके बाद मिट्टी में जिंक या आयरन वाले विशेष उर्वरक डाले जाते हैं या फसल के सही समय पर पत्तों के ऊपर इसका छिड़काव किया जाता है। मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए जैविक खाद और फायदेमंद जीवाणुओं का उपयोग किया जाता है ताकि पौधे ज्यादा पोषण सोख सकें।साथ ही पानी का सही प्रबंधन, फसल चक्र और मिट्टी की सेहत सुधारने के दूसरे तरीके अपनाए जाते हैं।