ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की चार नई और उन्नत किस्में रखी गई हैं। ये किस्में किसानों और चीनी मिलों दोनों की जरूरतों का ध्यान रखती है। ट्रेड शो में शामिल इन किस्मों का नाम को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 है। इन किस्मों की औसत उत्पादन क्षमता 90 से 10 टन प्रति हेक्टेयर तक है।
बीते कुछ सालों में लाल सड़न रोग गन्ने की खेती में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ये किस्में लाल सड़न रोग से प्रतिरोधी हैं, जिससे फसल में रोग के प्रकोप का खतरा कम होता है। जानकारी के अनुसार, अंकुरण के मामले में भी ये किस्म काफी अच्छा प्रदर्शन करती है, जिससे शुरुआती दिनों में फसल का विकास तेज होता है।
चीनी मिलों के लिए भी यह किस्म काफी फायदेमंद है। गन्ने की पेराई के दौरान निकलने वाली चीनी की दर मिलों के लिए काफी अहम है। गन्ने की जितनी ज्यादा रिकवरी दर होगी, उतनी ही मिल को फायदा होगा। जानकारी के अनुसार, इन किस्मों की एक बड़ी खासियत इनकी अच्छी पेड़ी क्षमता है। एक बार फसल काटने के बाद अगली पेड़ी फसल भी बेहतरीन उत्पादन देती है। इससे अगली फसल की तैयारी में किसानों की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।