कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका काफी अहम है, लेकिन, सरकारी पहलों और नीतियों में उनकी भागीदारी कम दिखाई पड़ती है। इसी समस्या को केंद्र में रखकर RSS से जुड़ा भारतीय किसान संघ 30 सितंबर को राजधानी दिल्ली में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन करने वाला है। इस सम्मेलन में सात हजार महिला किसानों के शामिल होने की संभावना है।
नीति-निर्माण में महिलाओं को मिले भागीदारी
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र कहते हैं कि खेती, पशुपालन और मत्स्य पालन में महिलाओं की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है, लेकिन कृषि से जुड़े नीतिगत फैसलों में उनकी भागीदारी दिखाई नहीं देती है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि नीतियों में महिला किसानों को उचित भागीदारी दिलाना है।
बीकेएस की अखिल भारतीय महिला समन्वयक मंजू दीक्षित के अनुसार, इस कार्यक्रम का मकसद महिला किसानों में आत्मविश्वास पैदा लाना और उन्हें कृषि से जुड़े नीतिगत कदमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिला किसानों की पहचान और प्रतिष्ठा देने के साथ-साथ उनकी चुनौतियों को सामने लाने के लिए किया जा रहा है।
खेती की रीढ़ हैं महिलाएं
बीकेएस के अनुसार, महिलाएं कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं। मोहिनी मोहन मिश्र ने बताया कि बुवाई, रोपाई, कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे 60 से 80 फीसदी कृषि कार्य महिलाएं ही करती हैं। बीकेएस का कहना है कि उनके पास 50 लाख सदस्य हैं, जिनमें से सात लाख महिलाएं हैं।
इस एक दिवसीय कार्यक्रम में कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें प्राकृतिक और जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन और रोजगार सृजन और खाद्य प्रसंस्करण शामिल है। कार्यक्रम के दौरान चुनिंदा महिला किसानों को उनके बेहतरीन कामों के लिए सम्मानित भी किया जाएगा। बीकेएस का मानना है कि यह मंच कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को एक नई पहचान और सम्मान दिलाने में मदद करेगा।