खेती में मिट्टी की सेहत सुधारने और खाद के पोषक तत्वों का बेहतर इस्तेमाल करने में किसानों की मदद के लिए INERA और बायर ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत किसानों तक नई पीढ़ी का जैविक फसल पोषण समाधान पहुंचाया जाएगा, जो बदलती जलवायु की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। INERA, एब्सोल्यूट (Absolute) की कृषि जैव-प्रौद्योगिकी इकाई है। समझौते के तहत बायर अपने बिक्री नेटवर्क के माध्यम से INERA के उत्पाद का विपणन और वितरण करेगा।
मिट्टी और पौधों की सेहत सुधारने पर जोर
कंपनियों के मुताबिक, इस नए समाधान का उद्देश्य फसलों को दिए जाने वाले पोषक तत्वों के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ाना है। इससे पौधों को पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिल सकता है और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने में भी यह समाधान उपयोगी हो सकता है।
INERA की मूल कंपनी एब्सोल्यूट के पास NIP नाम का एक जैविक शोध मंच है। इसमें दुनिया के अलग-अलग कठिन पर्यावरणीय क्षेत्रों से जुटाए गए 35,000 से अधिक विशिष्ट सूक्ष्मजीवों के स्ट्रेन का संग्रह है। कंपनी इन सूक्ष्मजीवों, जैविक अणुओं और एंजाइमों का अध्ययन करके खेती के लिए उपयोगी समाधान विकसित करती है।
AI की मदद से खोजे जा रहे खेती के नए समाधान
एब्सोल्यूट का Nature+ नाम का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मंच जैविक आंकड़ों का विश्लेषण करता है। इसकी मदद से उपयोगी जैविक अणुओं और प्रोटीन की पहचान की जाती है। इसके बाद संभावित समाधानों का प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है और सफल होने पर उत्पाद विकास तथा खेतों में परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
कंपनी के अनुसार, इस तकनीक से कीट नियंत्रण के लिए RNAi आधारित जैविक समाधान, पेप्टाइड आधारित कृषि उत्पाद और AI की मदद से खोजे गए जैविक खरपतवारनाशक विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य फसलों की सुरक्षा और खेती की जरूरतों के लिए अधिक प्रभावी तथा स्थिर समाधान तैयार करना है।
50 हजार से अधिक खेत परीक्षणों का दावा
INERA के अनुसार, उसके जैविक कृषि समाधानों को विकसित करने और उनकी उपयोगिता जांचने के लिए 50,000 से अधिक खेत परीक्षण और किसान प्रदर्शन किए गए हैं। ये परीक्षण 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनाए गए विशेष परीक्षण भूखंडों सहित विभिन्न स्थानों पर किए गए हैं। कंपनी का कहना है कि बायर के व्यापक बिक्री नेटवर्क के माध्यम से उसके उत्पाद अधिक किसानों तक पहुंच सकेंगे।
किसानों की जरूरतों के हिसाब से समाधान विकसित करने पर जोर
एब्सोल्यूट के संस्थापक अगम खरे ने कहा कि कंपनी ऐसे जैविक समाधान विकसित करने पर काम कर रही है, जो किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार खेती करने, कीट नियंत्रण में प्रकृति की रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करें। बायर के साथ साझेदारी से इन स्वदेशी जैविक समाधानों को अधिक किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
वहीं, बायर के भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के क्रॉप साइंस डिवीजन के प्रमुख साइमन वीबुश ने कहा कि इस साझेदारी में INERA की जैविक तकनीक और बायर का कृषि क्षेत्र का अनुभव एक साथ आएंगे। इससे ऐसी तकनीक विकसित करने और किसानों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जो उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में उपयोगी हो।
जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कदम
यह साझेदारी भारत में कृषि के लिए जैविक उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है। इसका संबंध सरकार की PM-PRANAM योजना और BioE3 नीति जैसे प्रयासों से भी है, जिनका उद्देश्य कृषि में संसाधनों का बेहतर उपयोग और जैव-प्रौद्योगिकी आधारित समाधान को प्रोत्साहित करना है।
हालांकि, नए समाधान से किसानों की लागत और पैदावार पर कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन उत्पाद के इस्तेमाल, फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों में मिलने वाले परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।