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Home› Khabar Junction› India S Doors Open To Foreign Sugar After A Decade Imports Likely Again In The Upcoming Crushing Season Due

एक दशक बाद विदेशी चीनी के लिए खुले भारत के दरवाजे : कम बारिश के चलते आगामी पेराई सीजन में दोबारा आयात के आसार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 25 Sep 2026 05:59 PM IST
सार

  •  आगामी अक्तूबर महीने से भारत में गन्ना पेराई शुरू होने वाली है।
  • 2025-26 सीजन एक दशक में पहला ऐसा सीजन बना, जिसमें भारत को विदेश से चीनी का आयात करना पड़ा।
  • अब प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश से चीनी आयात की नौबत दोबार जन्म ले सकती है।

2026-27 पेराई सीजन में भी चीनी आयात की नौबत जन्म ले सकती है।
2026-27 पेराई सीजन में भी चीनी आयात की नौबत जन्म ले सकती है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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देश के प्रमुख गन्ना उत्पाद राज्यों में कम बारिश से गन्ने की गुणवत्ता में गिरावट का खतरा पैदा हो गया है। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि भारत को लगातार दूसरे साल भी चीनी का आयात करना पड़ सकता है। बता दें कि कम बारिश की वजह से चीनी की रिकवरी दर गिर सकती है, जिससे चीनी उत्पादन में कमी आने का खतरा है।

एक दशक बाद आयात करने की बनी थी नौबत
बीते लगभग एक दशक से भारत में जरूरत से ज्यादा चीनी का उत्पादन होता आया है, लेकिन उत्पादन में गिरावट और चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी को देखते हुए इस बार केंद्र सरकार को विदेश से कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देने पड़ी। 

अक्तूबर की पेराई पर पड़ेगा सीधा असर
उद्योग जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में लंबे समय से बारिश की कमी है। इसके साथ ही, कर्नाटक ने जलाश्यों के पानी को सिंचाई के बजाय पीने के इस्तेमाल के लिए प्राथमिकता दी है। वहीं, महाराष्ट्र भी इस कदम पर विचार कर रहा है। उद्योग अधिकारियों का कहना है कि इस सब की वजह से अक्तूबर महीने में शुरू होने वाला गन्ना पेराई सीजन के दौरान गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा में गिरावट आ सकती है।

पीने के पानी को लेकर राज्यों का अहम फैसला
देश के तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक ने अपने जलाशयों का पानी पीने के लिए सुरक्षित (रिजर्व) कर लिया है। वहीं, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भी इसी तरह का कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।

सरकार के कदमों से कीमतें हुईं स्थिर
बाजार में चीनी के बढ़ते दामों को रोकने के लिए सरकार की तरफ से कई कदम उठाए गए हैं। सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट (भंडारण की सीमा) लागू करने, आयात करने और गन्ने की जल्दी पेराई शुरू करने की अनुमति देने जैसे फैसलों से अब चीनी की कीमतें स्थिर हो गई हैं।


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