भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अक्टूबर से लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोमवार को बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है और अक्टूबर में लागू होने की उम्मीद है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने की योजना है।
समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में 100 फीसदी निर्यात पर शुल्क मुक्त पहुंच देगा। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद बताई गई है।
कृषि में कीवी, सेब और शहद पर सहयोग
भारत-न्यूजीलैंड समझौते में कृषि क्षेत्र के लिए भी विशेष प्रावधान हैं। दोनों देश कीवी, सेब और शहद जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर मिलकर काम करेंगे। इसके तहत पौध रोपण सामग्री, कृषि अनुसंधान, तकनीकी सहायता, बाग प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की व्यवस्था, सप्लाई चेन और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग किया जाएगा। यानी समझौता केवल कृषि उत्पादों के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन और तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का रास्ता खोलता है।
न्यूजीलैंड को भारत में 95% द्विपक्षीय व्यापार पर बाजार पहुंच
समझौते के तहत भारत ने न्यूजीलैंड के लिए 70.03 फीसदी टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच की पेशकश की है। इससे दोनों देशों के बीच होने वाले करीब 95 फीसदी द्विपक्षीय व्यापार को कवर किया जाएगा। हालांकि भारत ने करीब 29.97 फीसदी टैरिफ लाइनों को बाहर रखा है। इनमें डेयरी, कई कृषि उत्पाद, चीनी, कुछ धातुएं और अन्य संवेदनशील उत्पाद शामिल हैं। इसका मतलब है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षा देने के लिए भारत ने कुछ उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।
कुछ उत्पादों पर तुरंत शुल्क खत्म
समझौते के तहत भारत में न्यूजीलैंड से आने वाले कुछ उत्पादों पर तत्काल आयात शुल्क खत्म करने का प्रावधान है। इनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खाल जैसे उत्पाद शामिल हैं। करीब 35.60 फीसदी टैरिफ को अगले 3, 5, 7 या 10 साल में चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रावधान है। कुछ उत्पादों जैसे वाइन, दवाइयों, पॉलिमर और कुछ एल्युमिनियम, लौह और इस्पात उत्पादों पर शुल्क में कमी की जाएगी। वहीं कुछ उत्पादों के लिए टैरिफ-रेट कोटा रखा गया है। इनमें मनुका शहद, सेब, कीवीफ्रूट और एल्ब्यूमिन शामिल हैं।
15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
समझौते में न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय के आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। समझौते से निवेश, शोध और नवाचार, तकनीक, कौशल, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है।
भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए भी अवसर
FTA में भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए कुछ नए अवसर भी शामिल किए गए हैं। Temporary Employment Entry Visa के तहत हर साल 5,000 कुशल भारतीयों के लिए तीन साल तक न्यूजीलैंड में काम करने का रास्ता बनाया गया है। इसमें IT, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों के साथ आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी शामिल हैं। इसके अलावा Working Holiday Visa के तहत हर साल 1,000 युवा भारतीय 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहकर काम कर सकेंगे।
भारतीय छात्रों के लिए भी प्रावधान
समझौते में छात्र गतिशीलता और पढ़ाई के बाद काम से जुड़े प्रावधान भी हैं। पात्र भारतीय छात्र पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 20 घंटे तक काम कर सकेंगे। उनकी पढ़ाई और योग्यता के आधार पर पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अवधि बढ़ाने का प्रावधान भी है।
न्यूजीलैंड की संसद से मिल चुकी मंजूरी
भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल को FTA पर हस्ताक्षर किए थे। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को इस समझौते से जुड़े कानून को मंजूरी दी। वोटिंग में 93 सांसदों ने इसके पक्ष में और 29 ने विरोध में मतदान किया। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और कारोबार तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
भारत के लिए कृषि और निर्यात दोनों अहम
भारत के नजरिए से इस समझौते में निर्यात बाजार का विस्तार और कृषि सहयोग, दोनों महत्वपूर्ण हैं। भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड में बेहतर बाजार पहुंच का फायदा मिल सकता है, जबकि कृषि तकनीक, बागवानी, खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन में सहयोग से दोनों देशों को लाभ होने की संभावना है।
हालांकि डेयरी और कुछ अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों को भारत ने समझौते से बाहर रखा है। ऐसे में कृषि व्यापार में नए अवसरों के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बनाए गए प्रावधान भी इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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