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India Climate Has Changed In 70 Years With Heat And Drought Spreading To Uttar Pradesh
Climate Change: 70 साल में बदली भारत की जलवायु, यूपी तक फैला गर्मी और सूखे का दायरा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:13 PM IST
सार
भारत में 70 साल में जलवायु बदल गई है। आईएमडी के अध्ययन में उत्तर भारत में गर्मी और सूखे का दायरा बढ़ने, पूर्वी यूपी तक शुष्क क्षेत्र फैलने और दक्षिण भारत में बदलाव का खुलासा हुआ।
जलवायु संकट की मार झेल रही खेती
- फोटो : गांव जंक्शन
भारत की जलवायु में पिछले 70 वर्षों के दौरान बड़े बदलाव आए हैं। उत्तर भारत के कई इलाके पहले के मुकाबले अधिक गर्म और सूखे हो गए हैं। सूखे और कम बारिश वाले क्षेत्र का दायरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बढ़कर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। वहीं, दक्षिणी भारत में नमी और बारिश में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिकों ने मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण कर देश का जलवायु मानचित्र नए सिरे से तैयार किया है।
70 साल के मौसम के आंकड़ों का अध्ययन
आईएमडी की पत्रिका मौसम में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दो अवधियों के आंकड़ों की तुलना की। इनमें पहली अवधि 1951 से 1980 और दूसरी 1991 से 2020 तक की है। इन आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जलवायु में आए बदलावों का आकलन किया।
करीब 7 फीसदी भूभाग ज्यादा सूखा हुआ
अध्ययन के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक गर्मी और कम बारिश वाले क्षेत्र का विस्तार हुआ है। 1951–1980 के दौरान यह क्षेत्र देश के करीब एक-चौथाई हिस्से में था, जबकि 1991–2020 के दौरान बढ़कर लगभग एक-तिहाई हिस्से तक पहुंच गया। इस दौरान देश का करीब 7 फीसदी भूभाग अधिक सूखे क्षेत्र में बदल गया।
इसके उलट, दक्षिणी यानी प्रायद्वीपीय भारत में गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र का दायरा 30 फीसदी से घटकर 16 फीसदी रह गया। यह बदलाव उत्तर और दक्षिण भारत में जलवायु के अलग-अलग रुझानों को दिखाता है।
खेती पर भी पड़ सकता है असर
आईएमडी पुणे की वैज्ञानिक अनन्या कर्मकार के मुताबिक, 1951 से 2020 तक के जलवायु मानचित्रों की तुलना में उत्तर भारत में सबसे स्पष्ट बदलाव दिखाई दिया है। गर्म और शुष्क क्षेत्र का विस्तार पूर्वी उत्तर प्रदेश तक हो गया है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में तापमान और बारिश के बदलते रुझान खेती को प्रभावित कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बोआई और कटाई के समय पर खास नजर रखने की जरूरत बताई है, ताकि मौसम में होने वाले बदलावों के अनुसार कृषि संबंधी फैसले लिए जा सकें।
यूरोप में भी गर्मी बनी जानलेवा
जलवायु परिवर्तन का असर यूरोप में भी गंभीर रूप से सामने आया है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, इस साल जून से अगस्त के बीच यूरोप के 30 देशों के 854 शहरों में गर्मी के कारण 50,391 मौतें होने का अनुमान है। इनमें करीब 32,600 मौतें सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बताई गई हैं।
नेचर हेल्थ जर्नल में प्रकाशित दो शोधपत्रों में शोधकर्ताओं ने इस साल के तापमान की तुलना उस संभावित तापमान से की, जो जलवायु परिवर्तन नहीं होने की स्थिति में रहता। इसके बाद तापमान और रोजाना होने वाली मौतों के संबंध पर आधारित मॉडल से गर्मी के कारण हुई मौतों का अनुमान लगाया गया।
अध्ययन के मुताबिक, यूरोप में इस साल गर्मी से हुई मौतों का अनुमान पिछले 26 वर्षों में सबसे अधिक है। ये आंकड़े बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन अब केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेहत, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहा है।
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