गुजरात में बारिश की कमी के बीच किसानों की खड़ी खरीफ फसलों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का फैसला किया है। खेड़ा और आणंद जिलों के माही कमांड क्षेत्र में करीब 80 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए कडाणा बांध से 19.8 करोड़ घन मीटर पानी छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 10 अक्टूबर से 5,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मंजूरी दी है। गांधीनगर स्थित सूचना निदेशालय की ओर से 9 अक्टूबर को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।
सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश
गुजरात में इस साल 1 जून से 10 अक्टूबर के बीच 810 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह इस अवधि की औसत बारिश का करीब 89 फीसदी है। पिछले साल इसी अवधि में 975 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जो औसत से करीब 10 फीसदी अधिक थी।
अक्टूबर में बारिश की कमी और बढ़ गई है। 1 से 10 अक्टूबर के बीच राज्य में केवल 0.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में औसतन 11 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी बारिश में करीब 97 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
धान, सब्जियों और तंबाकू की फसलों को मिलेगी मदद
आणंद और खेड़ा जिलों में इस खरीफ सीजन में करीब 3.8 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। इसमें धान, सब्जियों और तंबाकू की खेती प्रमुख है। दोनों जिलों में करीब 2.37 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की गई है, जो गुजरात के कुल धान क्षेत्र का लगभग एक चौथाई है।
इन जिलों में 34,900 हेक्टेयर में सब्जियां और 29,000 हेक्टेयर में तंबाकू बोया गया है। राज्य के कुल तंबाकू क्षेत्र का करीब 77 फीसदी हिस्सा इन्हीं दोनों जिलों में है। ऐसे में बांध से पानी छोड़ने के फैसले से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसलें अभी खेतों में खड़ी हैं और जिन्हें सिंचाई की जरूरत है।
कई फसलों की बुवाई में भी गिरावट
गुजरात में इस खरीफ सीजन में कुल 83.42 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि पिछले तीन साल का औसत 85.53 लाख हेक्टेयर रहा है। यानी कुल बुवाई क्षेत्र औसत से कम है। तिल और दलहन जैसी फसलों की बुवाई में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। तिल का क्षेत्र घटकर 20,348 हेक्टेयर रह गया, जबकि इसका औसत क्षेत्र 49,550 हेक्टेयर है। इस तरह तिल की बुवाई में करीब 59 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह मूंग की बुवाई 32 फीसदी घटकर 32,857 हेक्टेयर रह गई, जबकि इसका औसत क्षेत्र 56,236 हेक्टेयर है। ग्वार की बुवाई में भी करीब 40 फीसदी की गिरावट आई है।
नर्मदा परियोजना से भी बढ़ाई गई थी पानी की आपूर्ति
राज्य सरकार ने बारिश की कमी को देखते हुए 5 सितंबर को भी सिंचाई और जल आपूर्ति से जुड़े कई फैसले किए थे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में गांधीनगर में हुई बैठक में किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नर्मदा परियोजना से अतिरिक्त पानी देने और मौजूदा सिंचाई नेटवर्क के जरिये जल आपूर्ति बढ़ाने का फैसला लिया गया था।
इसके तहत माही कमांड क्षेत्र में 20 दिनों के लिए 5,000 क्यूसेक नर्मदा जल देने की मंजूरी दी गई थी। साउनी योजना की लिंक-1 के जरिये देवभूमि द्वारका और जामनगर में पानी की आपूर्ति 10 दिन बढ़ाई गई थी। वहीं, सुजलाम-सुफलाम पाइपलाइन योजना से उत्तर गुजरात को 2,000 क्यूसेक पानी देने की अवधि भी 15 दिन बढ़ाई गई थी।
अल नीनो के असर पर भी नजर
राज्य सरकार बारिश और जल उपलब्धता पर अल नीनो के संभावित असर को भी ध्यान में रख रही है। सरकार के मुताबिक, बारिश कम रहने और जलाशयों में पानी की आवक नहीं बढ़ने पर पीने के पानी की जरूरत को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। सरकार बारिश, जलाशयों के स्तर और उपलब्ध पानी की लगातार निगरानी कर रही है। जरूरत के अनुसार सिंचाई और पेयजल के बीच संतुलन बनाकर आगे के फैसले लिए जाएंगे।
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