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गुजरात : ₹100 करोड़ से बनेगा समुद्री जैव-तकनीक कॉरिडोर, तटीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 08 Oct 2026 06:02 PM IST
सार

  • पोरबंदर के मोचा गांव में बनेगा M-BRIC
  • पांच साल में ₹100 करोड़ निवेश की योजना
  • समुद्री शैवाल और माइक्रोएल्गी से बनेंगे हाई-वैल्यू उत्पाद
  • जैव उर्वरक, ओमेगा-3, पोषण और कॉस्मेटिक उत्पादों पर फोकस

समुद्र
समुद्र - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुजरात सरकार ने समुद्री संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और तटीय क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार पोरबंदर जिले के मोचा गांव में पांच साल में ₹100 करोड़ की लागत से मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (M-BRIC) विकसित करने की योजना बना रही है।

इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र से मिलने वाले जैविक संसाधनों को आधुनिक जैव-तकनीक की मदद से महंगे और उपयोगी उत्पादों में बदलना है। इससे नई औद्योगिक इकाइयों के साथ तटीय समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

समुद्री संसाधनों से बनेंगे कई उपयोगी उत्पाद
यह पहल गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की है। इसके लिए GSBTM, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और CSIR-CSMCRI के बीच समझौता (MoU) किया जाएगा।

कॉरिडोर के तहत समुद्री शैवाल, सूक्ष्म शैवाल (माइक्रोएल्गी), समुद्री सूक्ष्मजीव और खारे पानी वाले क्षेत्रों जैसे संसाधनों पर शोध किया जाएगा। इनसे जैव उर्वरक, पौधों की वृद्धि बढ़ाने वाले उत्पाद, पोषण से जुड़े उत्पाद, कॉस्मेटिक सामग्री, मछली और जलीय जीवों का चारा, एंजाइम और अन्य जैविक उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। समुद्री शैवाल से मिलने वाले अगर, एल्जिनेट और कैरेजीनन जैसे पदार्थों का भी औद्योगिक इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।

मोचा गांव बनेगा मुख्य केंद्र
पोरबंदर का मोचा गांव इस कॉरिडोर का मुख्य केंद्र होगा। यहां समुद्री संसाधनों पर शोध, शैवाल की खेती, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियां विकसित की जाएंगी। इसके तहत एक विशेष सीवीड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनाने की योजना है। इसमें समुद्री शैवाल की खरीद, धुलाई, शुरुआती प्रसंस्करण, अर्क निकालने, सुखाने, पाउडर बनाने, पैकेजिंग, भंडारण और गुणवत्ता जांच जैसी सुविधाएं होंगी। सौराष्ट्र और गुजरात के अन्य तटीय क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।

शैवाल की खेती को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर में एक राज्य स्तरीय सीवीड ब्रीड बैंक बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता वाले समुद्री शैवाल के पौध तैयार कर किसानों और उत्पादकों को उपलब्ध कराना है। इसके अलावा माइक्रोएल्गी से ओमेगा-3 फैटी एसिड और दूसरे उपयोगी जैविक पदार्थ तैयार करने के लिए जैव-उत्पादन केंद्र विकसित किए जाएंगे। समुद्री जैव विविधता, समुद्री सूक्ष्मजीव, प्राकृतिक उत्पाद, जीनोमिक्स और जैव-तकनीक से जुड़े शोध के लिए भी विशेष सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।

स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को भी मिलेगा मंच
M-BRIC में स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर बनाए जाने की योजना है। यहां प्रयोगशाला में तैयार तकनीक को बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए विकसित करने की सुविधा मिलेगी। इसका उद्देश्य शोध को सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर उसे व्यावसायिक उत्पादों में बदलना है। इसके लिए प्रोटोटाइप तैयार करने, तकनीक की जांच, पेटेंट, लाइसेंस, तकनीक हस्तांतरण और उद्योगों के साथ साझेदारी की व्यवस्था की जाएगी।

तटीय युवाओं और मछुआरों को प्रशिक्षण
इस परियोजना में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जोड़ा जाएगा। तटीय युवा, समुद्री शैवाल उत्पादक, मछुआरे, महिलाएं, MSME, स्टार्टअप, छात्र और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की योजना है। इनमें समुद्री शैवाल की खेती, एक्वाकल्चर, समुद्री जैव-तकनीक, प्राकृतिक उत्पाद, जैव-प्रसंस्करण, पर्यावरण निगरानी और उद्यमिता जैसे विषय शामिल होंगे।

पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
सरकार ने परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी अहम हिस्सा बनाया है। समुद्री शैवाल और सूक्ष्म शैवाल को ऐसे जैविक संसाधन के रूप में विकसित करने की योजना है, जिनसे पोषण उत्पाद, ओमेगा-3, जैव उर्वरक और दूसरे उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकें।

समुद्री जैव संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करने, कचरा कम करने और उत्पादों की कीमत बढ़ाने के लिए बायोरिफाइनरी मॉडल अपनाया जाएगा। इसके साथ समुद्री जैव विविधता, पर्यावरणीय प्रभाव और समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की निगरानी भी की जाएगी। समुद्री पारिस्थितिकी और ब्लू कार्बन से जुड़े शोध पर भी काम होगा।

गुजरात की ब्लू बायोइकोनॉमी को बढ़ावा
यह परियोजना गुजरात की जैव-तकनीक व्यवस्था, केंद्र के BioE3 फ्रेमवर्क, भारत की ब्लू इकोनॉमी प्राथमिकताओं और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जुड़ी है। राज्य सरकार का मानना है कि ₹100 करोड़ का यह निवेश समुद्री जैव-तकनीक, नए उद्योग, रोजगार और तटीय क्षेत्रों के टिकाऊ विकास के लिए एक नया मंच तैयार कर सकता है।
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