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खाद का सही इस्तेमाल सिखा रही सरकार : 50 हजार गांवों तक पहुंचेगा खेत बचाओ अभियान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Nov 2026 02:54 PM IST
सार

खेत बचाओ अभियान रबी 2026 के तहत सरकार 34 राज्यों के 700 से अधिक जिलों में 50 लाख किसानों को जागरूक करेगी। जानें मिट्टी की सेहत, खाद के सही इस्तेमाल और पराली प्रबंधन से जुड़ी पूरी जानकारी।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान-रबी 2026’ चला रही है। इसके तहत किसानों को खाद का संतुलित इस्तेमाल करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जाएगा। अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके जरिए करीब 50 लाख किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास नहीं, बल्कि कृषि से जुड़े विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसियों (ATMA) और वैज्ञानिक संस्थानों की मदद से यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर खाद डालने और खेती में प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी।

34 राज्यों के 700 से अधिक जिलों में चलेगा अभियान
‘खेत बचाओ अभियान-रबी 2026’ देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 700 से अधिक जिलों और 50 हजार गांवों तक पहुंचेगा। सरकार ने खाद का अधिक इस्तेमाल करने वाले 100 जिलों पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

अभियान के तहत 4,150 टीमों के माध्यम से किसानों तक जानकारी पहुंचाने की योजना है। इसमें कृषि विज्ञान केंद्रों और ATMA के कर्मचारी शामिल होंगे। 12 हजार से अधिक वैज्ञानिकों और कृषि विभाग से जुड़े कर्मचारियों की मदद भी ली जाएगी।

खाद का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करने की सलाह
अभियान का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को खाद का संतुलित इस्तेमाल सिखाना है। इसके लिए खाद डालने के चार सही तरीके बताए जाएंगे-
  • सही खाद : फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद चुनें।
  • सही मात्रा : जरूरत से ज्यादा खाद न डालें।
  • सही समय : फसल की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करें।
  • सही जगह : खाद को खेत में सही स्थान पर डालें।

इसके अलावा किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि खाद का संतुलित इस्तेमाल करने से खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

पराली जलाने के बजाय खाद बनाने पर जोर
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फसल अवशेषों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका इस्तेमाल खाद बनाने, मल्चिंग और वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

इसके साथ ही दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने तथा धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दूसरी फसल उगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे खेती में विविधता बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिल सकती है।

ढैंचा और मूंग की खेती से मिट्टी को मिलेगा फायदा
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में अभियान के तहत किसानों को ढैंचा और गर्मी की मूंग की खेती के फायदे बताए गए। मोतिहारी स्थित ICAR-महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान ने किसानों को हरी खाद और जैविक नाइट्रोजन के इस्तेमाल की जानकारी दी।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ढैंचा की फसल एक हेक्टेयर खेत में करीब 50 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। यह मात्रा लगभग 110 से 130 किलोग्राम यूरिया के बराबर है। वहीं, गर्मी की मूंग से एक हेक्टेयर में करीब 25 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन मिल सकती है, जो 55 से 65 किलोग्राम यूरिया के बराबर है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और फसल अवशेषों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी। रक्सौल ब्लॉक की पंतोका पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में 62 किसानों ने हिस्सा लिया, जिनमें 41 महिलाएं थीं।

खेतों में होंगे 50 हजार प्रदर्शन, 11,750 प्रशिक्षण कार्यक्रम
अभियान के तहत किसानों को केवल जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि खेतों में तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। किसान अपने खेतों में इन तरीकों को अपनाने से पहले उनके फायदे देख और समझ सकेंगे। सरकार ने अभियान के तहत 50 हजार खेत प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा है। इनमें 40 हजार प्रदर्शन कृषि विज्ञान केंद्रों और 10 हजार प्रदर्शन ICAR के संस्थानों की ओर से किए जाएंगे।

इसके अलावा किसानों के लिए 11,750 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इनमें प्राकृतिक खेती, खाद के संतुलित इस्तेमाल, कीट प्रबंधन, फसल अवशेष प्रबंधन और दलहन-तिलहन की बेहतर खेती के तरीके बताए जाएंगे। अभियान के दौरान किसानों को खेतों पर होने वाले प्रदर्शन देखने, फसल कटाई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और दूसरे सफल किसानों के खेतों का दौरा करने का मौका भी मिलेगा।

सोशल मीडिया और सरकारी योजनाओं की भी मिलेगी जानकारी
किसानों तक अभियान की जानकारी पहुंचाने के लिए व्हाट्सऐप, फेसबुक और एक्स जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान के जरिए सोशल मीडिया पर 1.5 करोड़ किसानों तक पहुंचने और कुल डिजिटल पहुंच को 2.5 करोड़ तक बढ़ाने की योजना है।

इसके अलावा किसानों को पीएम-किसान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए संस्थागत कर्ज की सुविधा से जोड़ने पर भी जोर रहेगा।

पहले अभियान में एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने का दावा
सरकार के मुताबिक, खेत बचाओ अभियान का पहला चरण 1 से 30 जून 2026 तक चलाया गया था। उस दौरान 1,657 टीमों ने गांवों में किसानों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। पहले चरण में 1.34 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए 92.44 लाख किसानों तक पहुंचने का दावा किया गया। इसके अलावा हरी खाद और जैव उर्वरकों के इस्तेमाल पर 6,685 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनसे 4.94 लाख किसानों को फायदा पहुंचा। अभियान के तहत 3,167 खेत प्रदर्शन और 4,779 संवाद कार्यक्रम भी हुए।

सरकार के अनुसार, पहले चरण में किसानों और दूसरे संबंधित लोगों को मिलाकर करीब 1.07 करोड़ लोगों तक सीधी पहुंच बनाई गई। सोशल मीडिया के जरिए लगभग 4.5 करोड़ लोगों तक अभियान की जानकारी पहुंचाई गई। सरकार का कहना है कि रबी 2026 अभियान के जरिए मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती में खाद और दूसरे संसाधनों का सही इस्तेमाल बढ़ाने तथा किसानों को टिकाऊ खेती के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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