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गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी: सीतापुर में पेराई की तैयारी तेज, चीनी मिलों का 80% काम पूरा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 10 Oct 2026 02:17 PM IST
सार

  • सीतापुर जिले की चीनी मिलों में मरम्मत और रखरखाव का करीब 80% काम पूरा हो चुका है।

  • मौसम अनुकूल रहने पर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच पेराई शुरू होने की उम्मीद है।

  • चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र के गन्ना मूल्य के रूप में 2,112 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गन्ना किसानों के लिए नए पेराई सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में चीनी मिलों ने मरम्मत और रखरखाव का करीब 80 फीसदी काम पूरा कर लिया है। मौसम अनुकूल रहा तो अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच मिलों में पेराई शुरू हो सकती है। इससे किसानों को समय पर गन्ने की कटाई और ढुलाई करने में मदद मिलेगी।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजगणपति आर. की अध्यक्षता में हुई बैठक में पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र के गन्ना मूल्य के रूप में कुल 2,112 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

गन्ना ढुलाई के लिए दुरुस्त होंगी सड़कें
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिलों तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत कराई जाए। सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के साथ उन पर लटक रही पेड़ों की शाखाओं को भी काटने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गन्ना लाने वाले वाहनों को आवागमन में परेशानी नहीं होगी और ढुलाई में देरी से बचा जा सकेगा। उन्होंने बिजली विभाग को ढीले तारों की मरम्मत करने और व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए, ताकि पेराई सत्र के दौरान किसी तरह की बाधा न आए।

कई विभाग मिलकर करेंगे तैयारी
बैठक में चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), जिला गन्ना अधिकारी, सहायक चीनी आयुक्त और लोक निर्माण, सिंचाई, बिजली, वन, परिवहन तथा बाट-माप विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर पेराई सत्र समय पर शुरू कराना है। प्रशासन का जोर है कि मिलों में मरम्मत का काम समय से पूरा हो, सड़कें दुरुस्त रहें और गन्ने की ढुलाई सुचारू रूप से हो सके। इससे किसानों को अपनी कटी फसल मिलों तक पहुंचाने में अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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