आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि किसानों की जमीन और उनके मालिकाना हक की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। किसान को अपनी जमीन की सुरक्षा की चिंता करने के बजाय खेत में फसल उगाने पर ध्यान देना चाहिए। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को जमीन के ऐसे दस्तावेज मिलें, जिनमें कोई गलती न हो और जिनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को प्रकाशम जिले के कोंडापी विधानसभा क्षेत्र के नरसिंगोलु गांव में ‘मी भूमि-मी हक्कू’ (आपकी जमीन-आपका अधिकार) कार्यक्रम में किसानों को पट्टादार पासबुक वितरित कर रहे थे। इन पासबुक पर राज्य का आधिकारिक चिह्न लगा है। नायडू ने कहा, “किसान के हाथ में हल होना चाहिए, न कि आवेदन लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी। जमीन और उस पर अधिकार आपके हैं, उनकी सुरक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है।”
40.58 लाख पट्टादार पासबुक बांटीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 40.58 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं। अक्टूबर में 790 गांवों में चार लाख से अधिक पासबुक बांटी गईं। सरकार ने सभी पात्र जमीन मालिकों तक त्रुटिरहित दस्तावेज पहुंचाने के लिए हर महीने का लक्ष्य तय किया है।
कार्यक्रम के दौरान नायडू ने बालम्मा और कोटेश्वर राव को जमीन से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे। दोनों किसानों ने जमीन से संबंधित लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रकाशम जिले के चार मंडलों में गर्भा कंद्रिका जमीन से जुड़े दशकों पुराने विवादों को भी सुलझाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
16.48 लाख एकड़ जमीन प्रतिबंधित सूची से हटाई
नायडू ने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार पर जमीन विवाद बढ़ाने, अतिक्रमण की समस्याएं पैदा करने और राजस्व व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संपत्ति मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लैंड टाइटलिंग एक्ट को वापस ले लिया गया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार ने 16.48 लाख एकड़ जमीन को धारा 22ए की प्रतिबंधित सूची से हटाया है। इसके अलावा कांगुंडी, अमलापुरम और सेट्टीपल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में विवादों में फंसी 41 हजार एकड़ जमीन से जुड़े मामलों का समाधान किया गया है।
दो साल में पूरा होगा जलाशय प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री ने कोंडापी विधानसभा क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें 166 करोड़ रुपये की लागत वाली पोथुला चेंचैया-पलेरू जलाशय परियोजना और मुप्पल्ला में पलेरू नदी पर 27.85 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला पुल शामिल है।
नायडू ने कहा कि जलाशय परियोजना को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे 9,500 एकड़ जमीन को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और 15 गांवों के करीब 35 हजार लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा। इसके अलावा पोन्नालुरु मंडल के वेमुरुपाडु में सड़क निर्माण परियोजना की भी घोषणा की गई।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर खर्च होंगे 11 हजार करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सिंचाई, आवास, पेयजल और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के साथ औद्योगिक परियोजनाओं को भी आगे बढ़ा रही है। वेलिगोंडा परियोजना के दूसरे चरण को पूरा करके अधिक क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने की योजना है। वहीं, ‘पल्ले पंडुगा’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और मंगलागिरी में 60 हजार लोगों को 52 हजार करोड़ रुपये मूल्य के आवासीय भूमि अधिकार दिए गए हैं। सरकार ने तीन लाख घरों के निर्माण की आधारशिला रखी है और छह लाख अन्य घर बनाने की योजना है। ‘जल जीवन अमरजीवी जलधारा’ कार्यक्रम के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए 31 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
40 नदियों को जोड़ने की योजना
नायडू ने कहा कि राज्य में जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए 40 नदियों को जोड़कर जल ग्रिड बनाने की योजना है। अगले तीन वर्षों में 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
औद्योगिक विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रस्तावित 1.5 लाख करोड़ रुपये की भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) रिफाइनरी और रामायपट्टनम बंदरगाह के निर्माण कार्य में तेजी लाने की बात कही। सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं के जरिये निवेश बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
केंद्र से परियोजनाओं और फंड की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के सहयोग से गठबंधन सरकार जनता का भरोसा बहाल करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश के लिए नई परियोजनाओं और वित्तीय सहायता की मांग को लेकर पिछले दो दिनों में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री और आठ केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की गई।
नायडू के मुताबिक, सरकार कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों पर लोगों की राय जानने के लिए आईवीआरएस (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम) का इस्तेमाल कर रही है। इससे मिलने वाले सुझावों के आधार पर योजनाओं की कमियों को दूर किया जाएगा। कार्यक्रम में राज्य के कई मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
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