केरल के कोल्लम जिले के आठ गांवों को केंद्र सरकार की पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESA) की प्रस्तावित अधिसूचना में शामिल किए जाने के विरोध में वामपंथी किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने 27 अक्टूबर को बंद का एलान किया है। बंद सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक रहेगा। किसान संगठनों का आरोप है कि राज्य सरकार ने केंद्र को भेजी अपनी सिफारिश में केरल के 33 गांवों को इस सूची से बाहर करने की मांग की, लेकिन कोल्लम के आठ गांवों को लेकर उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया।
76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को लेकर चिंता
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन कर रहे संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की प्रस्तावित अधिसूचना में कोल्लम जिले के आठ गांवों की करीब 76 हजार हेक्टेयर जमीन को शामिल किया गया है। उनका आरोप है कि इस फैसले से पहले स्थानीय किसानों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका से जुड़ी चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
संगठनों के मुताबिक, कुलाथुपुझा और चन्नापेट्टा जैसे प्रमुख व्यावसायिक और रिहायशी इलाके भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में हजारों परिवार पीढ़ियों से खेती और दूसरे स्थानीय रोजगार पर निर्भर हैं। किसानों को आशंका है कि पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित होने से उनकी आजीविका और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
राज्य सरकार पर भी उठाए सवाल
किसान संगठनों ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार को गांवों को सूची से बाहर करने संबंधी प्रस्ताव भेजने से पहले किसान संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा नहीं की गई।
संगठनों ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया और केंद्र को भेजा गया आधिकारिक नक्शा सार्वजनिक क्यों नहीं किया। उनका कहना है कि इससे प्रभावित गांवों के लोगों को सरकार के प्रस्ताव और उसके संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
24 और 25 अक्टूबर को मशाल जुलूस
किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने की भी घोषणा की है। इसके तहत 24 और 25 अक्टूबर को प्रभावित क्षेत्रों के सभी वार्डों में मशाल जुलूस निकाले जाएंगे। वहीं, 27 अक्टूबर को बंद के दौरान सभी प्रभावित गांवों में दिनभर सत्याग्रह किया जाएगा। संगठनों का कहना है कि इस आंदोलन का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले संभावित असर की ओर दिलाना है।
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