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Home› Khabar Junction› Gm Products Will Never Be Imported Into India Piyush Goyal States That The Use Of Rennet Derived From Foreign

भारत में कभी नहीं आएंगे GM उत्पाद : विदेशी चीज का हवाला देकर पीयूष गोयल बोले- धार्मिक आस्था से समझौता नहीं...

गांव जंक्शन डेस्क, जामताड़ा Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 03 Nov 2026 05:05 PM IST
सार

  • व्यापार समझौतों पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बडा बयान दिया है, उनका कहना है कि भारत कभी जीएम उत्पादों के आयात को अनुमति नहीं देगा
  • केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि भारत उन उत्पादों के लिए संवेदनशील है, जिनमें हम मजबूत हैं।
  • व्यापार समझौतों में किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और छोटे उद्योगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
  • धार्मिक भावनाओं का हवाला देते हुए विदेशी डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रेनेट पर सख्त प्रमाणीकरण की जरूरत बताई।
  • बता दें कि विदेश में रेनेट का इस्तेमाल चीज बनाने में होता है, इसे मरे हुए बछड़ों के पेट की परत से प्राप्त किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारत ने कई देशों संग व्यापार समझौते पक्के कर लिए हैं, जबकि कई देशों के साथ इस दिशा में बातचीत का दौर जारी है। इस बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से साफ किया है कि भारत ने कभी किसी जीएम उत्पाद के आयात को अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी ऐसा कभी नहीं होगा। उन्होंने इसे काफी संवेदनशील मामला बताया। इस बयान को खासतौर से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जोड़ कर देखा जा रहा है। वर्तमान में दोनों देश इस समझौते को पक्का करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में इस समझौते का प्रस्तावित ढांचा जारी किया गया था, जिसके बाद कई जानकारों ने भारत में अमेरिकी जीएम उत्पादों के आगमन की तरफ इशारा किया था।

डेयरी उत्पादों पर रियायत नहीं दी
केंद्रीय मंत्री ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डेयरी क्षेत्र भी काफी संवेदनशील है और भारत ने किसी भी व्यापार समझौते के तहत डेयरी उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। बता दें कि भारत का कृषि क्षेत्र बड़ी जनसंख्या की रोजी-रोटी का माध्यम है। ऐसे में किसी भी व्यापार समझौते के तहत विकसीत देशों से कृषि उत्पादों का आायत किसान आय पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि अमेरिका जैसे देशों में उत्पादन की लागत भारत के मुकाबले काफी कम है। अगर यह उत्पाद रियायत पर भारतीय बाजार में पहुंचे, तो किसानों को प्रतिस्पर्धा करने में चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

भारत उन उत्पादों के लिए संवेदनशील है, जिनमें हम मजबूत हैं
व्यापार समझौतों पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने साफ किया कि भारत कुछ कृषि उपजों और उन उत्पादों को विदेशी व्यापार के लिए खोलने को लेकर बेहद संवेदनशील हैं जिनमें हम बहुत मजबूत हैं, जैसे कि समुद्री उत्पाद। हम अपने डेयरी क्षेत्र को खोलने के प्रति भी बहुत संवेदनशील हैं। वास्तव में, आज तक हमने किसी के लिए भी अपना डेयरी क्षेत्र नहीं खोला है।

धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान 
उन्होंने खानपान से जुड़ी धार्मिक आस्था का जिक्र करते हुए कहा, "हम भारत में किसी भी जीएम उत्पाद को आने की अनुमति न देने को लेकर पूरी तरह सजग हैं; हमने इसकी कभी अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी कभी नहीं देंगे। हम अपनी धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखते हैं। विदेशों में डेयरी उत्पादन बनाते समय अक्सर बछड़े के मांस या रेनेट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी हम भारत में कतई अनुमति नहीं देते। इसके लिए सख्त प्रमाणीकरण अनिवार्य है ताकि देश के एक बड़े हिस्से की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। बता दें कि रेनेट चीज बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक एंजाइम है, जो पारंपरिक रूप से मरे हुए बछड़ों के पेट की परत से प्राप्त किया जाता है।

किसानों, मछुआरों और छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत ने अब तक जिन व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, उनमें देश ने किसी भी संवेदनशील वस्तु पर कभी कोई समझौता नहीं किया है। सरकार का उद्देश्य अपने किसानों, मछुआरों और छोटे व मध्यम उद्योगों के हितों की रक्षा करना है। मंत्री के अनुसार, सरकार की कोशिश उन क्षेत्रों में नए अवसर और नया रोजगार पैदा करने की है जहां भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी हैं, ताकि देश के बड़े हिस्से, छोटे उद्योगों और कृषि से जुड़े किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सके।

विदेशी बाजारों में भारतीय सामान के लिए कम टैक्स की मांग
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत व्यापार वार्ताओं में हमेशा कपड़ा, दवा, कृषि उत्पादों और रत्न व आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए विदेशी बाजारों में तरजीही पहुंच की मांग करता है। उन्होंने कहा, यह सब हमारे आक्रामक हित के क्षेत्र हैं, जहां हम बेहतर बाजार पहुंच हासिल करने के लिए काम करते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस जैसे हमारे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले कम हो। उन्होंने जोड़ा कि सरकार का पूरा प्रयास यही रहता है कि भारत को प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले रियायती दरें मिलें।

विनिर्माण और नए स्टार्टअप्स पर सरकार का ध्यान
रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार देश में विनिर्माण को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम विनिर्माण और ज्यादा सरकारी नौकरियों को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। जो लोग नियमित रोजगार की तलाश में हैं, उनके लिए ज्यादा अवसर बनाने का प्रयास जारी है। लेकिन आज की दुनिया उद्यमिता और स्टार्टअप्स के लिए नए रास्ते खोल रही है और नए अवसर दे रही है, जिस पर मैं आप सभी से गंभीरता से विचार करने का आग्रह करूंगा।


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