कम मानसूनी बारिश और बड़े त्योहारों की तारीख आगे बढ़ने से ग्रामीण मांग पर असर देखने को मिला है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने के दौरान ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री इससे पहले वाले महीने की तुलना में 12.6 प्रतिशत गिर गई। वहीं, सुस्त ग्रामीण मांग के बावजूद कुल वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
फाडा के अनुसार, सितंबर महीने में डीलरों ने कुल 76,906 ट्रैक्टर बेचे, जो अगस्त महीने में बेचे गए 87,977 ट्रैक्टरों के मुकाबले कम है।
एक दशक का सबसे कमजोर मानसून बना कारण
साल 2026 का मानसून एक दशक से ज्यादा समय का सबसे कमजोर सीजन दर्ज किया गया है। खेती-बाड़ी के नजरिए से प्रमुख राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक की कई तहसीलें सूखे की चपेट में हैं। वहीं, देश के अधिकतर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। जानकार किसान आय में दबाव की संभावना जता रहे हैं।
ग्रामीण मांग सीधे मानसून से जुड़ी हुई है। कम बारिश को देखते हुए ग्रामीण परिवारों ने अभी के लिए ट्रैक्टर जैसे बड़े उत्पादों की खरीद टाल दी है।
दोपहिया और यात्री वाहनों की बिक्री में भारी उछाल
ट्रैक्टरों की बिक्री में गिरावट के उलट, दोपहिया और यात्री वाहनों की कुल खुदरा बिक्री में शानदार तेजी देखी गई है। पिछले साल जीएमटी में कटौती का लाभ मिलने से यह बिक्री सालाना आधार पर 31.8 प्रतिशत बढ़कर 25.4 लाख (2.54 मिलियन) इकाई पर पहुंच गई है। वाहनों की बिक्री में यह बढ़ोतरी तब दर्ज की गई है, जब वाहन निर्माता कंपनियों ने अपनी बढ़ती लागत की भरपाई के लिए गाड़ियों की कीमतें बढ़ाई हैं।
डीलरों ने दी आगे मांग घटने की चेतावनी
वाहनों की बढ़ती कीमतों पर डीलरों ने चेतावनी भी जारी की है। डीलरों का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा कीमतों में और बढ़ोतरी की जाती है, तो टैक्स कटौती से ग्राहकों को जो राहत या फायदा मिला था, वह खत्म हो सकता है। इससे आने वाली तिमाही में वाहनों की मांग में कमी आने का खतरा पैदा हो सकता है।