खेती-किसानी के लिए कर्ज लेने के वास्ते अब किसानों को बैंकों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। कर्ज लेने की इस डिजिटल व्यवस्था में उत्तर प्रदेश पूरे देश में सबसे आगे निकल गया है। ई-किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल पर यूपी के किसानों के आवेदन एक लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं। ऐसा मुकाम हासिल करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बन गया है।
आठ महीने में हासिल की बड़ी उपलब्धि
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने यह बड़ी उपलब्धि महज आठ महीने के छोटे से समय में हासिल की है। इस सूची में करीब 95 हजार आवेदनों के साथ कर्नाटक दूसरे स्थान पर है, जबकि हरियाणा तीसरे नंबर पर मौजूद है। इस नई व्यवस्था के आने से कर्ज लेने की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया अब कुछ ही मिनटों में पूरी हो रही है। अब किसान बिना किसी परेशानी के घर बैठे ही इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
समय पर कर्ज चुकाने पर लगता है सिर्फ 4 फीसदी ब्याज
नियमों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को खेती के लिए 7 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर कर्ज दिया जाता है। जो किसान समय पर अपना कर्ज पूरा चुका देते हैं, उन्हें ब्याज में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाती है। इस तरह ईमानदार किसानों के लिए कर्ज की प्रभावी ब्याज दर घटकर केवल 4 प्रतिशत ही रह जाती है।
नाबार्ड की पहल से सूदखोरों और बिचौलियों से मुक्ति
जानकारी के अनुसार, ई-केसीसी 'राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक' (नाबार्ड) की एक अहम पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीब किसानों को सूदखोरों और बिचौलियों के जाल से बाहर निकालना है। यह ऑनलाइन व्यवस्था विशेष रूप से सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए विकसित की गई है। इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा कागजातों की जरूरत नहीं होती, बल्कि किसान की पहचान सीधे उसके 'आधार कार्ड' के माध्यम से आसानी से कर ली जाती है।