महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सूखे के हालात को देखते हुए प्रशासन ने फसल अवशेषों की बड़े पैमाने पर खरीद, ढुलाई और गैर-जरूरी औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नांदेड़ के कलेक्टर राहुल करडिले ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। प्रशासन के मुताबिक, जिले की 16 तहसीलों में से 14 को महाराष्ट्र की उन 265 तहसीलों में शामिल किया गया है, जहां सूखा घोषित किया गया है।
इस साल जिले में सामान्य से कम बारिश हुई है। ऐसे में आने वाले महीनों में चारे की कमी की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए प्रशासन किसानों को फसल अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रहा है। प्रशासन किसानों को सोयाबीन, गेहूं, ज्वार, चना, अरहर और गन्ने समेत अन्य फसलों के अवशेषों को पौष्टिक पशु चारे में बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
प्रशासन के अनुसार, सोयाबीन के अवशेष, सूखी डंठल, चारा, गन्ने का कचरा, खोई और अन्य कृषि अवशेषों की बड़ी मात्रा में खरीद उद्योगों द्वारा की जा रही थी। इनका इस्तेमाल बायोमास, बायोकोल और दूसरे औद्योगिक कामों में ईंधन के रूप में किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि सूखे के समय इन अवशेषों को उद्योगों में भेजने के बजाय पशुओं के लिए पौष्टिक चारा तैयार करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बड़े पैमाने पर इनके औद्योगिक इस्तेमाल से जिले में पशु चारे की कमी और बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए नांदेड़ जिले में पशुओं के लिए जरूरी कृषि अवशेषों की बड़े पैमाने पर खरीद और ढुलाई के साथ-साथ उनके गैर-जरूरी औद्योगिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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