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Cooperative Minister Said Target To Set Up 2 Lakh New Pacs Plan To Promote Circular Economy In Dairy
सहकारिता मंत्री बोले: 2 लाख नए पैक्स स्थापित करने का लक्ष्य, डेयरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की योजना
गांव जंक्शन डेस्क, गांधीनगर
Published by: Devesh Saraswat
Updated Sun, 18 May 2025 03:30 PM IST
सार
सहकारी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र ने पंजीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को वित्तीय मोर्चे पर बीमार होने से बचाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने एलान किया कि पैक्स के बंद होने की स्थिति में उनके त्वरित निपटान और उनके स्थान पर नए पैक्स के पंजीकरण के लिए सरकार नई नीति लाएगी।
गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह
- फोटो : सोशल मीडिया
सहकारी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को वित्तीय मोर्चे पर बीमार होने से बचाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने एलान किया कि पैक्स के बंद होने की स्थिति में उनके त्वरित निपटान और उनके स्थान पर नए पैक्स के पंजीकरण के लिए सरकार एक नीति लाएगी।
2029 तक दो लाख नए पैक्स स्थापित करने का लक्ष्य
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार का लक्ष्य साल 2029 तक दो लाख नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि पैक्स को 22 अलग-अलग प्रकार के व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है कि पंजीकृत पैक्स वित्तीय रूप से बीमार न हों।
22 प्रकारों के व्यवसायों को पैक्स से जोड़ने की पहल
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 22 विभिन्न प्रकार के व्यवसायों को पैक्स से जोड़ने का काम किया गया है और मुझे यकीन है कि आने वाले समय में एक भी पंजीकृत पैक्स वित्तीय रूप से बीमार न हो, इसके लिए व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र जल्द ही बंद होने की स्थिति में गए पैक्स के त्वरित निपटान और उनके स्थान पर नए पैक्स के पंजीकरण के लिए एक नई नीति लाने जा रहा है।
डेयरी क्षेत्र में नए प्रयोग की योजना
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की डेयरी क्षेत्र के लिए बनाई जा रही योजना भी साझा की है। उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही डेयरी क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी के साथ प्रयोग करने की योजना बना रही है। इसके लिए सहकारी समिति का गठन किया जाएगा, जिसके तहत पशुओं के मरने पर उनकी खाल, हड्डियों और सींगों का उपयोग किया जाएगा। इसके आलावा आइसक्रीम, चीज, पनीर बनाने, दूध को ठंडा रखने और फैट मापने जैसे उपकरणों के निर्माण के लिए सहकारी स्वामित्व वाली कंपनी को शामिल करने की पहल की जा रही है।
सहकारिता मंत्री ने दिए तीन सूत्र
उन्होंने कहा कि अगर सहकारी क्षेत्र को आगे बढ़ाना है, तो हमें हर समूह में जागरूकता, प्रशिक्षण और पारदर्शिता लाने के प्रयास करने होंगे। केंद्रीय सहकारिता विभाग ने इसे सहकारिता वर्ष का लक्ष्य बनाया है। इसलिए केंद्र ने सहकारिता के विज्ञान और सहकारिता में विज्ञान दोनों को महत्व दिया है यानी सहकारिता के विज्ञान को पुनर्जीवित और आधुनिक बनाना और सहकारिता में प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।
सहकारी नेताओं की जिम्मेदारी
सहकारिता मंत्री अमित शाह के अनुसार, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान शुरू हुआ सहकारिता आंदोलन गुजरात को छोड़कर देश के कई हिस्सों में समाप्त हो गया था। शाह ने कहा कि अब गुजरात के सहकारी नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे इस आंदोलन को पूरे देश में बराबरी से फैलाएं। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए हाल के वर्षों में हुए बदलावों को निचले स्तर तक ले जाना चाहिए, जिससे पैक्स सदस्यों और किसानों को लाभ मिल सके।
सहकारिता आंदोलन से हर जिला और राज्य जुड़े
सहकारिता मंत्री अमित शाह के अनुसार, हर जिला, हर राज्य को सहकारिता आंदोलन से जोड़ा जाना चाहिए, हर राज्य में प्राथमिक मंडली की स्थिति में सुधार होना चाहिए, जिला स्तर पर संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए, जिससे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी ढांचे को मजबूती मिले। इसे हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ने तीन स्तरीय ढांचे के स्थान पर चौथे स्तर के सहकारी ढांचे की परिकल्पना की है। उन्होंने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष का उपयोग समान विकास के लिए करना चाहते हैं।
तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है सहकारिता अभियान
अमित शाह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष का उपयोग संतुलित विकास के लिए किया जाएगा। यह अभियान तीन स्तंभों पर आधारित है - पहला सहकारिता को समाज की मुख्यधारा में लाना, दूसरा तकनीक के जरिये पारदर्शिता और प्रामाणिकता लाना और तीसरा ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को सहकारी आंदोलन से जोड़ना। शाह ने कहा कि इसके लिए उनके मंत्रालय ने करीब 57 पहल की हैं। शाह ने कहा कि सहकारी समितियों के बीच सहयोग की आवश्यकता है और इस विचार को गुजरात में लागू किया गया है, जिससे सहकारी क्षेत्र की जमाराशि में 11,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
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