भारतीय रिजर्व बैंक के सितंबर वाले रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत के ग्रामीण और कस्बों में अर्थव्यवस्था, रोजगार और आमदनी को लेकर लोगों की चिंताएं 2026 में लगातार बढ़ी हैं। 8,799 लोगों की राय पर आधारित इस सर्वे से पता चलता है कि ग्रामीण परिवारों को अपनी वर्तमान स्थिति और भविष्य की उम्मीदों के बीच एक बड़ा अंतर महसूस हो रहा है।
अर्थव्यवस्था को लेकर आम लोगों की राय में लगातार गिरावट
आरबीआई (RBI) का 'करंट सिचुएशन इंडेक्स' (CSI), जो अर्थव्यवस्था, रोजगार, महंगाई और आमदनी की वर्तमान स्थिति को मापता है, जुलाई के 91.7 से गिरकर सितंबर में 90.6 पर आ गया है। जनवरी 2026 में यह 100.5 था, जिसके बाद से इसमें लगातार छठी बार गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल सितंबर 2025 (100.9) के मुकाबले इसमें भारी कमी आई है। सर्वे के अनुसार, सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार और आमदनी—तीनों ही मोर्चों पर लोगों का नजरिया पहले से ज्यादा नकारात्मक हुआ है।
आमदनी घटी और रोजगार की चिंता बढ़ी
आमदनी के आंकड़े खासतौर पर ध्यान खींचने वाले हैं। सितंबर के सर्वे में केवल 20.6% लोगों ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले उनकी आय बढ़ी है, जबकि 30.5% लोगों का कहना है कि उनकी आमदनी घट गई है। पिछले साल (सितंबर 2025 में) आय घटने की बात कहने वाले लोग 26.5% थे। इसी तरह रोजगार को लेकर भी लोगों की निराशा का आंकड़ा -8.0 (जुलाई) से और खराब होकर -10.5 (सितंबर) पर पहुंच गया है।
महंगाई बन रही है सबसे बड़ी परेशानी
ग्रामीण परिवारों के लिए महंगाई एक बड़ा दबाव बनकर उभरी है। सर्वे के अनुसार, 93.2% लोगों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले कीमतें बढ़ गई हैं (जुलाई में यह आंकड़ा 91.6% था)। लोगों के अनुसार वर्तमान महंगाई का अनुमान मई में 5.9% और जुलाई में 6.1% था, जो सितंबर में बढ़कर 6.8% हो गया। भविष्य को लेकर भी डर है: अगले एक साल के लिए महंगाई का अनुमान जुलाई के 7.4% से बढ़कर सितंबर में 7.9% हो गया है। 85.9% लोगों को लगता है कि अगले साल कीमतें और बढ़ेंगी।
खर्च में कमी नहीं, जरूरी चीजों की मांग मजबूत
इन तमाम चिंताओं के बावजूद, सर्वे से यह बात सामने आई है कि ग्रामीण परिवारों ने अपना खर्च कम नहीं किया है। सितंबर में खर्च का सूचकांक जुलाई के 77.4 से सुधरकर 79.6 हो गया। जरूरी चीजों (Essential items) पर खर्च बेहद मजबूत (84.2) रहा, वहीं गैर-जरूरी चीजों पर भी खर्च का आंकड़ा बढ़कर 39.3 हो गया है।
भविष्य को लेकर अब भी उम्मीदें कायम
वर्तमान हालात से निराशा के बावजूद, आने वाले समय की उम्मीदों को मापने वाला 'फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स' (FEI) 112.8 पर है। हालांकि यह जनवरी के 129.3 के मुकाबले काफी नीचे आ गया है, लेकिन 100 से ऊपर होने का मतलब है कि ग्रामीण जनता आने वाले साल को लेकर अभी भी सकारात्मक सोच रखती है।