विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Center Of Excellence For Biofuels Will Be Built In Nsi Kanpur Scientists Of Iitk And Nsi Will Work Together

NSI में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बायो फ्यूल्स: IITK और NSI के वैज्ञानिक मिलकर करेंगे काम, जानें सबकुछ

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Sun, 16 Jun 2024 06:49 PM IST
सार

एनएसआई की निदेशक प्रोफेसर सीमा परोहा ने बताया कि कैंपस में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बायो फ्यूल्स में सभी आवश्यक उपकरण, पायलट प्लांट और यंत्रों के साथ केन्द्रीय उपकरणों की सुविधा से युक्त अत्याधुनिक प्रयोगशाला होगी। इस पर आने वाली लागत के लिए मंत्रालय स्वीकृति प्रदान कर चुका है।

एक-दूसरे को समझौता पत्र हस्तांतरित करते आईआईटी कानपुर और एनएसआई के अधिकारी।
एक-दूसरे को समझौता पत्र हस्तांतरित करते आईआईटी कानपुर और एनएसआई के अधिकारी। - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (NSI) में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बायो फ्यूल्स का निर्माण किया जाएगा। इसमें एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने और जैव ईंधन के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए एनएसआई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (IITK) ने समझौता किया है। 

शनिवार को भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (शर्करा) अश्वनी श्रीवास्तव, आईआईटी के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल और एनएसआई की निदेशक प्रो. सीमा परोहा की उपस्थिति में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बायो फ्यूल्स के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।

समझौते के तहत क्या फैसले लिए गए?
  • दोनों संस्थानों के बीच ये समझौता तीन साल के लिए हुआ है। 
  • इस दौरान दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ देश में बायोफ्यूल उत्पादन को लेकर काम करेंगे। 
  • एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने पर भी वैज्ञानिकों का फोकस होगा।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?
एनएसआई की निदेशक प्रोफेसर सीमा परोहा ने बताया कि कैंपस में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बायो फ्यूल्स में सभी आवश्यक उपकरण, पायलट प्लांट और यंत्रों के साथ केन्द्रीय उपकरणों की सुविधा से युक्त अत्याधुनिक प्रयोगशाला होगी। इस पर आने वाली लागत के लिए मंत्रालय स्वीकृति प्रदान कर चुका है।

आईआईटी कानपुर के साथ यह ‘समझौता’ नवाचारी तकनीकों के विकास, मौजूदा प्रक्रियाओं के अनुकूलन और जैव ईंधन प्रौद्योगिकी की पायलट परियोजनाओं को स्थापित करते हुए उन्नत, दीर्घकालिक और उच्च गुणवत्ता वाले जैव ईंधन के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो अंततः ऊर्जा आपूर्ति को संरक्षित करने, कार्बन डाइआक्साइड के अनावश्यक उत्सर्जन को कम करते हुए जलवायु को संरक्षित करने और जैव ईंधन पर निर्भरता एवं कच्चे तेल के आयात को कम करने में सहायक होगा। कार्यक्रम में आईआईटी के प्रो. राजीव जिंदल, प्रो. देबोपम दास, एनएसआई से विनय कुमार, अनूप कुमार कनौजिया एवं डॉ. आर अनंतलक्ष्मी उपस्थित रहे। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन