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कच्चे चावल से आगे बढ़ेगा कारोबार : नूडल्स से प्रोटीन तक नए बाजार तलाशेगा भारत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 30 Sep 2026 05:58 PM IST
सार

  • राइस नूडल्स का वैश्विक बाजार 2024 के 6.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 11 अरब डॉलर होने का अनुमान।
  • राइस ब्रान ऑयल बाजार 2030 तक 6.3 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान, भारत में करीब 8.5 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का आकलन।
  • राइस प्रोटीन बाजार 2030 तक 28.14 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।
  • चावल की भूसी से बनी सिलिका का वैश्विक बाजार 2033 तक 1.41 अरब डॉलर होने का अनुमान।

चावल
चावल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत अब सिर्फ कच्चे चावल के निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहता। चावल से बनने वाले नूडल्स, राइस ब्रान ऑयल, प्रोटीन, आटा, स्टार्च और औद्योगिक उत्पादों के बढ़ते वैश्विक बाजार में देश अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नई दिल्ली में 23 से 25 अक्टूबर तक होने वाले भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 में इन उत्पादों की कारोबारी संभावनाओं पर चर्चा होगी।

चावल से ज्यादा कमाई वाले उत्पादों पर नजर
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में ‘बियॉन्ड रॉ राइस: द नेक्स्ट बिलियन-डॉलर अपॉर्च्युनिटी’ नाम से एक विशेष सत्र होगा। इसमें चावल से जुड़े ऐसे उत्पादों की पहचान की जाएगी, जिनमें बाजार की मांग, मुनाफा, निवेश और निर्यात की सबसे बेहतर संभावनाएं हैं। आयोजकों के मुताबिक, IREF-EY का आकलन यह पता लगाएगा कि किन उत्पादों को भारत में बड़े स्तर पर तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारा जा सकता है।

नूडल्स और राइस ब्रान ऑयल का बाजार बढ़ रहा
दुनिया में चावल से बने नूडल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। Grand View Research के अनुसार, वैश्विक राइस नूडल्स बाजार 2024 में 6.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 11 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसी तरह राइस ब्रान ऑयल का वैश्विक बाजार 2023 के 4.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 में 6.3 अरब डॉलर होने का अनुमान है। नीति आयोग की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में राइस ब्रान ऑयल का उत्पादन करीब 19 लाख टन तक पहुंचने की क्षमता है। इसमें करीब 8.5 लाख टन की संभावित क्षमता अभी इस्तेमाल नहीं हो रही है।

राइस प्रोटीन और स्टार्च में भी अवसर
चावल से बनने वाले प्रोटीन की मांग भी बढ़ रही है। Grand View Research के अनुसार, वैश्विक राइस प्रोटीन बाजार 2023 के 16.85 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 में 28.14 करोड़ डॉलर हो सकता है। सम्मेलन में राइस प्रोटीन के साथ राइस फ्लोर और फंक्शनल स्टार्च पर भी चर्चा होगी। इसमें इनके उत्पादन के लिए जरूरी तकनीक, ग्राहकों की जरूरत और व्यावसायिक रूप से लाभदायक उत्पादन पर ध्यान दिया जाएगा।

चावल की भूसी से भी बनेगा कारोबार
चावल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के उत्पादों तक सीमित नहीं है। इसकी भूसी से निकलने वाली राख से सिलिका बनाई जा सकती है, जिसका इस्तेमाल रबर और टायर उद्योग समेत कई क्षेत्रों में होता है।Grand View Research के अनुसार, राइस-हस्क-ऐश से बनने वाले सिलिका का वैश्विक बाजार 2025 के करीब 64.06 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2033 तक 1.41 अरब डॉलर हो सकता है। वर्ष 2025 में इस बाजार में रबर और टायर उद्योग की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी थी। टायर कंपनी Goodyear ने 2025 में बताया था कि वह यूरोप में ट्रक रेसिंग के टायरों में चावल की भूसी की राख से बनी सिलिका का इस्तेमाल कर रही है।

तीन रास्तों से बढ़ेगी वैल्यू
सम्मेलन में चावल से अधिक मूल्य हासिल करने के लिए तीन प्रमुख रास्तों पर चर्चा होगी।
  • बेहतर उत्पाद : प्रीमियम और विशेष किस्म के चावल।
  • बेहतर उपभोक्ता उत्पाद : नूडल्स, स्नैक्स, रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पाद।
  • बेहतर उपयोग : राइस ब्रान ऑयल, आटा, प्रोटीन, स्टार्च, भूसी से बनने वाले उत्पाद और बायोएनर्जी।

इसके अलावा चावल से बनने वाले पेय पदार्थों, साके और एथनॉल को भी चर्चा में शामिल किया जाएगा। जापान साके एंड शोचू मेकर्स एसोसिएशन के अनुसार, जापान का साके निर्यात 2025 में 4590 करोड़ येन रहा, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 6 फीसदी अधिक है।

सिर्फ बाजार बड़ा होना काफी नहीं
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अध्यक्ष राजीव सेतिया ने कहा कि अगला अवसर केवल चावल की मात्रा बढ़ाकर निर्यात करने में नहीं, बल्कि हर टन चावल से अधिक मूल्य हासिल करने में है। उनके मुताबिक, मिलर, निर्यातक और खाद्य सामग्री बनाने वाली कंपनियों के लिए अलग-अलग कारोबारी रास्ते होंगे।

IREF-EY का आकलन बाजार की मांग, संभावित मुनाफा, प्रसंस्करण के बाद मिलने वाली मात्रा, निवेश, बाजार तक पहुंच और निर्यात क्षमता के आधार पर उत्पादों का मूल्यांकन करेगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि वैश्विक बाजार के बढ़ने से भारतीय कंपनियां वास्तव में कितना कारोबार हासिल कर सकती हैं। BIRC 2026 में जारी होने वाली ‘नेक्स्ट बिलियन-डॉलर अपॉर्च्युनिटी इन राइस’ घोषणा में संभावित उत्पादों, लक्षित बाजारों और निवेश, साझेदारी व पायलट प्रोजेक्ट के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

क्या बदलेगा?
इस पहल से भारत में चावल को केवल कृषि जिंस के रूप में देखने के बजाय उसके हर हिस्से से ज्यादा मूल्य हासिल करने पर जोर बढ़ सकता है। इससे चावल के दाने के साथ-साथ भूसी और अन्य उप-उत्पादों से भी नए कारोबार विकसित करने की संभावनाएं खुलेंगी।
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