विज्ञापन
Home Khabar Junction Burning Stubble Contributes 1 To Delhi S Pollution Officer Said Farmers Are Not Responsible For Air Pollutio

Stubble Burning: दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली का योगदान सिर्फ एक फीसदी, अफसर ने कहा दोषी नहीं किसान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 13 Jan 2025 01:25 PM IST
सार

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया है कि दिल्ली के प्रदूषण स्तर में पराली जलाने की घटनाएं केवल एक फीसदी योगदान देती हैं। इस पर हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) ने कहा कि दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए पंजाब और हरियाणा के किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए पराली नहीं जिम्मेदार
दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए पराली नहीं जिम्मेदार - फोटो : गांव जंक्शन डेस्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आमतौर पर हर साल धान की कटाई के दौरान दिल्ली-एनसीआर इलाके में वायु प्रदुषण एक गंभीर समस्या का रूप  लेता है। इस बार भी ऐसा हुआ सुप्रीम कोर्ट ने परली जलने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारों को आदेश दिए। वहीं, राज्य सरकारों ने परली नहीं जलने के लिए किसानों पर जुर्माने से लेकर पराली नहीं जलने पर प्रोत्साहन योजनाएं भी लांच की थी। 

लेकिन, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया है कि दिल्ली के प्रदुषण स्तर में पराली जलाने की घटनाएं केवल 1 फीसदी का योगदान देती हैं। इस पर हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) अशोक खेमका ने कहा कि राजधानी दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए पंजाब और हरियाणा के किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। नोट में सीएक्यूएम के अध्यक्ष द्वारा ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) की जनवरी 2023 की रिपोर्ट पर भरोसा करने का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में कृषि अवशेष जलाने से केवल 1% का योगदान है।

खेमका ने कहा कि पराली जलाना स्थानीय वायु गुणवत्ता के लिए हानिकारक है और इसे रोका जाना चाहिए, लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली में खराब होती वायु गुणवत्ता के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। TERI की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सड़क और खुले क्षेत्र की धूल खराब वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण योगदान देती है। गर्मियों में PM10 में धूल का योगदान 38 से 42 फीसदी और सर्दियों में 23 से 31 फीसदी होता है, जबकि PM 2.5 में इसका योगदान गर्मियों में 31 से 34 फीसदी और सर्दियों में 15 फीसदी होता है। वहीं, गर्मी के सीजन में शुष्क मौसम इस समस्या को और बढ़ा देती हैं।

कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे के एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें पाया गया था कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की भूमिका मात्र 1.3 फीसदी है। वहीं, वाहनों का योगदान प्रदुषण में 14.2 फीसदी प्रदूषण होता है, उसके बाद निर्माण गतिविधि और धूल का स्थान प्रदुषण के कारक बनते हैं। पराली जलाने में कमी आने के बाद दिल्ली का सालाना PM2.5 स्तर 2024 में लगातार दूसरे वर्ष बढ़ा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का वार्षिक PM2.5 स्तर 3.4 फीसदी बढ़कर 104.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया। प्रदुषण का यह स्तर स्वीकार्य राष्ट्रीय वार्षिक मानक से दोगुना से भी अधिक है। यह बढ़ोतरी अक्तूबर से दिसंबर 2024 के दौरान पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में पराली जलाने की घटनाओं में 71.2 फीसदी की गिरावट के बावजूद हुई।

हरियाणा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार पराली जलाने से दूरी बनाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन योजना बना रही है। वर्तमान में। वर्तमान में हरियाणा परली के प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये देता है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल की वजह से 2023 की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में 47 फीसदी की कमी आई है
विज्ञापन
विज्ञापन