बिहार के गांवों में अब पशुपालकों को पशुओं की देखभाल और पशुपालन से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल करने में मदद के लिए स्थानीय महिला कार्यकर्ता उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार ‘सुधा सखी’ पहल का विस्तार सभी 8,053 पंचायतों तक करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रशिक्षित महिलाएं पशुपालकों और पशु चिकित्सकों के बीच कड़ी का काम करेंगी। साथ ही पशुओं की प्राथमिक देखभाल, संतुलित आहार और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के बारे में जानकारी देंगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करना है।
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह पहल शुरू की है। इसे राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के तहत सहकार से समृद्धि योजना से जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत गांवों में डेयरी उत्पादक सहकारी समितियों के गठन पर भी जोर दिया जा रहा है।
पशुपालन से जुड़ी सेवाओं में मदद करेंगी सुधा सखियां
सुधा सखियों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, संतुलित पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान और वैज्ञानिक पशुपालन से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। अब ये महिलाएं अपने गांवों में पशुपालकों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सकों से संपर्क कराने में मदद करेंगी।
इससे पशुपालकों को पशुओं की देखभाल से जुड़ी जानकारी स्थानीय स्तर पर मिल सकेगी। हालांकि, पशुओं की बीमारी का इलाज और चिकित्सकीय निर्णय पशु चिकित्सक ही करेंगे। सुधा सखियां सेवा आधारित व्यवस्था के तहत काम करेंगी। उन्हें काम के आधार पर कमीशन या प्रोत्साहन राशि मिलने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए आमदनी का नया जरिया तैयार हो सकता है।
12 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किसानों को डेयरी से जोड़ने का लक्ष्य
बिहार में फिलहाल करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। सरकार आने वाले समय में यह संख्या बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़ने की योजना है।
डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भी इस पहल का अहम उद्देश्य है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर डेयरी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी करीब 70 प्रतिशत है। बिहार में इसे बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
सभी 534 प्रखंडों में खुलेंगे पशु औषधि बिक्री केंद्र
पशुपालकों तक पशु चिकित्सा से जुड़ी सुविधाएं और दवाएं पहुंचाने के लिए बिहार के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने की पहल भी की जा रही है। इन केंद्रों का उद्देश्य पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर पशुओं की दवाएं उपलब्ध कराने में मदद करना है।
सुधा सखियों के माध्यम से पशुपालकों को उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी भी दी जा सकेगी। इससे गांवों में पशुपालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सही सहायता तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
7 हजार जीविका दीदियों को मिल चुका है प्रशिक्षण
कॉम्फेड और जीविका के संयुक्त प्रयास से करीब 7,000 जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये प्रशिक्षित महिलाएं अब अपने गांवों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की दूसरी महिला सदस्यों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं।
आने वाले समय में इस पहल का दायरा डेयरी से आगे बढ़ाकर भेड़, बकरी और सूअर पालन जैसी गतिविधियों तक ले जाने की योजना है। इससे पशुपालन से जुड़ी महिलाओं को अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
योजना के तहत अगले वर्ष तक राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में सुधा सखियों का चयन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने, पशुपालकों को जरूरी सेवाओं से जोड़ने और बिहार में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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