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मछुआरों की आय बढ़ाने की तैयारी: बिहार में बनेंगे पांच खास मछली क्लस्टर, 50,200 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य

गांव जंक्शन डेस्क, पटना Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 13 Aug 2026 03:40 PM IST
सार

  • बिहार में 'विजन 2030' के तहत 50,200 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य, आठ प्राथमिकता परियोजनाओं से होगा काम।
  • एफआईडीएफ और पीएमएमएसवाई योजनाओं के जरिए मिलेगी आर्थिक मदद, प्रसंस्करण-बिक्री में भी बढ़ेगा रोजगार।
  • सीवान, सारण, मुंगेर, मिथिला और मोतिहारी में बनेंगे अलग-अलग खासियत वाले मछली क्लस्टर।
  • मुख्यमंत्री ने मछुआरा सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने पर दिया जोर।

बिहार के अलग-अलग हिस्सों की खासियत के हिसाब से विशेष मछली क्लस्टर बनाए जाएंगे।
बिहार के अलग-अलग हिस्सों की खासियत के हिसाब से विशेष मछली क्लस्टर बनाए जाएंगे। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना स्थित लोक सेवा आवास के 'संकल्प' सभागार में 'विजन 2030 - बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजनाओं' की समीक्षा की। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में इस बात पर खास जोर दिया गया कि बिहार को देश के अग्रणी अंतर्देशीय मछली पालन राज्यों में शामिल किया जाए, मछली उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाए, रोजगार और आय के अवसर बढ़ाए जाएं और 'ब्लू इकोनॉमी' को रफ्तार दी जाए।

आठ बड़ी परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव श्रीसत कपिल अशोक ने बैठक में प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि 'विजन 2030' के तहत बिहार के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए एक पूरा खाका तैयार किया गया है। इसके तहत आठ प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के जरिए 1,848.75 हेक्टेयर सीधे विकास वाले क्षेत्र और 9,357 हेक्टेयर असर वाले क्षेत्र को विकसित करने का प्रस्ताव है। इस पूरी योजना से 50,200 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

इन परियोजनाओं के लिए आर्थिक मदद मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के जरिए जुटाई जाएगी। इससे मछली उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, बिक्री-व्यापार और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

अलग-अलग जिलों में बनेंगे खास मछली क्लस्टर
राज्य के अलग-अलग हिस्सों की खासियत के हिसाब से विशेष मछली क्लस्टर बनाए जाएंगे:
  • सीवान में वेटलैंड (आर्द्रभूमि) क्लस्टर का समग्र विकास
  • सारण में बड़े झींगे (स्कैंपी) के उत्पादन के लिए स्कैंपी क्लस्टर
  • मुंगेर में पिंजरा पद्धति (केज कल्चर) से मछली पालन के लिए केज क्लस्टर
  • मिथिला क्षेत्र, खासकर मधुबनी में, वेटलैंड आधारित मछली पालन
  • मोतिहारी में एक व्यापक मछली क्लस्टर का विकास
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में मत्स्य पालन के समग्र विकास की कार्ययोजना पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए स्पष्ट, चरणबद्ध और सुनियोजित रणनीति तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर मछुआरा परिवारों की आय को लगातार बढ़ाना सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने मछुआरा सहकारी समितियों को कौशल विकास, तकनीकी क्षमता और बेहतर प्रबंधन के जरिए और सशक्त बनाने की भी बात कही, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो और कुल कमाई बढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में मत्स्य पालन क्षेत्र में भारी संभावनाएं हैं, इसलिए उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 'विजन 2030' किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने, नए रोजगार पैदा करने और बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।

बैठक में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव श्रीसत कपिल अशोक, मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
 
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