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Egg And Chicken: अंडा और चिकन क्यों हुए महंगे? जानिए कैसे महंगे पोल्ट्री फीड ने बिगाड़ा पूरा गणित

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 29 Aug 2026 12:20 PM IST
सार

  • देशभर में अंडे और चिकन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
  • पोल्ट्री उत्पादन की कुल लागत में फीड का हिस्सा करीब दो-तिहाई है।
  • पोल्ट्री फीड की कीमत करीब 3,600 रुपये से बढ़कर 4,400 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है।
  • मक्का की कीमतों पर पोल्ट्री के साथ-साथ एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग का भी असर पड़ रहा है।

अंडा और चिकन
अंडा और चिकन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत में इस साल अंडे और चिकन की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। आम लोगों के लिए प्रोटीन के सस्ते और आसान स्रोत माने जाने वाले अंडे और चिकन अब पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं। इसके पीछे मौसम की मार, मौसमी सप्लाई में कमी और उत्पादन लागत बढ़ने जैसे कई कारण हैं। CLFMA of India के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी द्वारा बिजनेस लाइन में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक पोल्ट्री फीड यानी मुर्गियों के दाने की बढ़ती लागत है।

मक्का, सोयाबीन खली और दूसरे फीड उत्पाद महंगे होने से हर अंडे और एक किलो चिकन के उत्पादन की लागत बढ़ गई है। पोल्ट्री उद्योग में फीड का खर्च कुल उत्पादन लागत का करीब दो-तिहाई होता है। इसलिए फीड की कीमत बढ़ने का सीधा असर किसानों की लागत और फिर बाजार में अंडे और चिकन की कीमत पर पड़ता है।

मक्का और सोयाबीन से बढ़ी लागत
पोल्ट्री फीड में मक्का और सोयाबीन खली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री हैं। मक्का मुर्गियों को ऊर्जा देता है, जबकि सोयाबीन खली प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, पोल्ट्री फीड में करीब 55-60 प्रतिशत हिस्सा मक्के का होता है। ऐसे में मक्के की कीमत में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी पोल्ट्री किसानों की लागत पर बड़ा असर डालती है। 

इस साल पोल्ट्री फीड की कीमत करीब 15 प्रतिशत बढ़कर ₹4,400 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई, जो पिछले साल लगभग ₹3,600 प्रति क्विंटल थी। वहीं, सोयाबीन खली की कीमत करीब ₹62,000 से ₹65,000 प्रति टन बनी हुई है। नई फसल आने से पहले उद्योग में करीब 15 लाख टन की कमी का अनुमान लगाया गया है।

इथेनॉल उद्योग से मक्के की मांग बढ़ी
मक्के की बढ़ती कीमत का एक कारण केवल उत्पादन में कमी नहीं है। अब मक्के की मांग पोल्ट्री फीड के अलावा इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों से भी बढ़ रही है। इथेनॉल उद्योग में मक्के की खपत बढ़ने से उपलब्ध मक्के के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसका सीधा असर पोल्ट्री उद्योग पर पड़ रहा है।

जब मक्का महंगा होता है तो फीड कंपनियां दाम बढ़ाती हैं। इसके बाद पोल्ट्री किसानों की लागत बढ़ जाती है। अगर उन्हें फार्म स्तर पर उसी अनुपात में बेहतर भाव नहीं मिलता, तो उनका मुनाफा कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में किसान या तो उत्पादन घटाते हैं या बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा अंडे और चिकन की कीमत में जोड़ देते हैं। अंततः इसका असर रिटेल कीमतों पर दिखाई देता है।

सोयाबीन की सप्लाई भी चिंता का कारण
पोल्ट्री उद्योग के लिए सोयाबीन खली भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, सोयाबीन उत्पादन में कमी और बारिश को लेकर अनिश्चितता से इसकी सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। जून में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने बढ़ती सोयाबीन खली की कीमत और कमजोर मुनाफे के बीच उद्योग के एक बड़े हिस्से द्वारा उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत तक कटौती की योजना की जानकारी दी थी। अगर फीड की लागत लगातार बढ़ती रहती है तो पोल्ट्री किसान उत्पादन कम कर सकते हैं। इससे बाजार में अंडे और चिकन की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

गर्मी और बारिश ने भी बढ़ाई परेशानी
पोल्ट्री फीड महंगा होना ही अंडे और चिकन की कीमत बढ़ने का एकमात्र कारण नहीं है। इस साल तेज गर्मी और अनियमित बारिश ने भी पोल्ट्री उत्पादन को प्रभावित किया है।

बहुत ज्यादा गर्मी में मुर्गियों पर तनाव बढ़ता है। इससे वे कम दाना खाती हैं, उनका वजन बढ़ने की रफ्तार प्रभावित होती है और अंडे का उत्पादन भी कम हो सकता है। दूसरी ओर, अनियमित बारिश से मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे पोल्ट्री फीड के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है।

अंडे के दाम में भी तेज बढ़ोतरी
इसका असर बाजार में भी दिखाई दिया है। जुलाई में हैदराबाद में फार्म स्तर पर अंडे की कीमत में एक महीने में करीब 15 प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई बाजारों में एक अंडे की खुदरा कीमत करीब ₹8.50 से ₹9 तक पहुंच गई। तेज गर्मी से ब्रॉयलर उत्पादन प्रभावित होने के कारण कुछ जगहों पर चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।

भारत में अंडे का उत्पादन कितना है?
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, भारत ने 2024-25 में करीब 149.11 अरब अंडों का उत्पादन किया। इसमें कमर्शियल पोल्ट्री का योगदान करीब 84.49 प्रतिशत रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पोल्ट्री उद्योग देश के खाद्य बाजार और लोगों की प्रोटीन जरूरतों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इतने बड़े उद्योग में उत्पादन लागत में मामूली बढ़ोतरी भी करोड़ों उपभोक्ताओं पर असर डाल सकती है।

आने वाले दिनों में क्या होगा?
अंडे और चिकन की मौजूदा महंगाई के पीछे महंगा पोल्ट्री फीड, मक्के की बढ़ती मांग, सोयाबीन खली की सीमित सप्लाई, मौसम की मार और कुछ जगहों पर कम उत्पादन जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। जब तक मक्का और सोयाबीन की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और फीड की लागत कम नहीं होती, तब तक अंडे और चिकन के दाम कृषि बाजार और मौसम की स्थिति के प्रति संवेदनशील बने रह सकते हैं।

यह स्थिति यह भी बताती है कि भारत में सस्ते प्रोटीन की उपलब्धता कितनी हद तक मक्का और सोयाबीन की कीमतों पर निर्भर करती है। खेत में उगने वाली इन फसलों की कीमत बढ़ने का असर आखिरकार पोल्ट्री फार्म से होते हुए सीधे उपभोक्ता की थाली तक पहुंचता है।

 
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