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Fish Waste: मछली के कचरे से जुड़ेंगी टूटी हड्डियां और दांत, वैज्ञानिकों ने खोजी कमाल की तकनीक...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 21 Apr 2026 09:31 AM IST
सार

अक्सर मछली बाजार का जिक्र बुरी गंध की याद दिलाता है। इन बाजारों में मछलियों के शल्क यानी ऊपरी छिलके को फेंक दिया जाता है। लेकिन, यही कचरा मेडिकल क्षेत्र में कामी काम आने वाला है।
 

मछली के कचरे से होगी कमाई।
मछली के कचरे से होगी कमाई। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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अक्सर मछली बाजार का जिक्र बुरी गंध की याद दिलाता है। इन बाजारों में मछलियों के शल्क यानी ऊपरी छिलके को फेंक दिया जाता है। लेकिन, यही कचरा मेडिकल क्षेत्र में कामी काम आने वाला है।

कोच्चि स्थित आईसीआर-केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक पेटेंट तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के तहत मछली के ऊपरी छिलके को नैनोफाइबर ग्राफ्ट (पतले रेशों वाली जाली) में बदलकर टूटी हड्डियों और दांतों को तेजी से ठीक किया जा सकेगा।

हड्डी के विकास को बढ़ावा देगी तकनीक
मछली के छिलके में हाइड्रॉक्सीएपेटाइट नाम का एक खास खनिज पाया जाता है। यह खनिज बिल्कुल इंसानों की हड्डी और दांतों की परत यानी इनेमल जैसा होता है। वैज्ञानिक इलेक्ट्रो-स्पिनिंग नाम की एक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके इस शल्क से बेहद पतले रेशे बनाते हैं।

पुरानी तकनीकें सिर्फ हड्डियों की खाली जगह को भरने का काम करती थीं, लेकिन यह नई तकनीक हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं को बढ़ने और जुड़ने में पूरी मदद करती है। इसके अलावा, इसके इस्तेमाल से दांतों और हड्डियों के इलाज के दौरान संक्रमण और सूजन का खतरा भी कम होता है।

देश में हर साल निकलता है 40 से 60 लाख टन कचरा
भारत में हर साल 1.9 करोड़ टन से ज्यादा मछली का उत्पादन होता है। इस वजह से करीब 40 से 60 लाख टन मछली का कचरा निकलता है। अब तक इस कचरे को या तो फेंक दिया जाता था या फिर मछलियों का चारा बनाने जैसी सस्ती चीजों में इस्तेमाल किया जाता था। वैज्ञानिकों ने बताया है कि मछलियों की त्वचा, हड्डियों और शल्क में कोलेजन और कैल्शियम जैसे कई कीमती तत्व मौजूद हैं।

जापान और नॉर्वे की तर्ज पर होगी कमाई
जापान और नॉर्वे जैसे देश पहले से ही मछली के कचरे का सही से बंटवारा और प्रोसेसिंग करके महंगे उत्पाद बना रहे हैं। हालांकि, भारत में सही सप्लाई चेन न होने और तकनीकी कमी के कारण अभी ऐसे मौकों का पूरा फायदा नहीं उठाया जा सका है।

तटीय इलाकों में खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
वैज्ञानिकों की यह नई खोज पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद है। अगर मछली के इस कचरे का थोड़ा हिस्सा भी मेडिकल के काम आने वाली चीजों में बदल दिया जाए, तो इससे कचरे और प्रदूषण की समस्या खत्म होगी और अच्छी खासी कमाई भी होगी।

तटीय इलाकों में इस नई तकनीक से रोजगार, रिसर्च और नए बिजनेस के शानदार मौके खुलेंगे।
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